राहुल चावला , धर्मशाला | हिमाचल प्रदेश में संविधान के 93वें संशोधन को वर्ड टू वर्ड लागू किया जाए। दो दशक से ओबीसी वर्ग इसके लागू होने का इंतजार कर रहा है, वर्ष 2006 के मुकाबले ओबीसी बच्चों की 101 पोस्टें बनती हैं, लेकिन अभी तक मात्र 14 सीटें ही मिल पाई हैं। पिछला चुनाव प्रदेश में भाजपा एक फीसदी वोट से हारी थी, लेकिन भाजपा ने केंद्र में हिमाचल का पक्ष मजबूती से नहीं रखा तो आगामी चुनाव में इस रेशो के बढऩे में देर नहीं लगेगी। यह बात हिमाचल जन क्रांति पार्टी के अध्यक्ष सुभाष शर्मा ने शनिवार को प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि संविधान के 93वें संशोधन को सुप्रीकोर्ट ने वर्ष 2006 से लागू करने के लिए कहा था, अब 2026 भी शुरू होने वाला है, लेकिन संशोधन को सही रूप में लागू नहीं किया गया है।
भाजपा और कांग्रेस ने ओबीसी कार्ड को खेलते हुए अब तक सत्ता पाई है, लेकिन ओबीसी को उनके हक दिलाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। 93वें संविधान संशोधन के तहत जिन परिवारों की आय 8 लाख से कम है, उन ओबीसी बच्चों को सरकारी संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण मिलना है। वर्ष 2006 से लेकर अब तक यह पोस्टें 101 बनती हैं, लेकिन भाजपा व कांग्रेस के नकारात्मक रवैये के कारण ओबीसी के बच्चों को 14 पोस्टें ही मिल पाई हैं। सरकार से आग्रह है कि सरकार इस ओर ध्यान देते हुए 93वें संविधान संशोधन अक्षरश लागू किया जाए।
समझ रही जनता, कहां अटक रहा पैसा
सुभाष शर्मा ने कहा कि प्रदेश में चल रही आर्थिक तंगी के लिए भाजपा जिम्मेवार है। उन्होंने कहा कि 75 हजार करोड़ रुपये भाजपा कार्यकाल में ओवरड्राफ्ट हो गया था। उस समय कर्मचारियों को उनके हक दे दिए होते तो 87 हजार करोड़ का ओवरड्राफ्ट होना था। हमारी मांग है कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डा. राजीव बिंदल और प्रदेश से संबंधित भाजपा के सांसद, दिल्ली में पीएम, केंद्रीय वित्त व गृह मंत्री से मिलकर उनके समक्ष हिमाचल में वित्तीय स्थिति ठीक न होने की वजह से जो आक्रोश पनप रहा है, उसे दूर करने की दिशा में कदम उठाएं और हिमाचल के लिए बजट रिलीज करवाएं। भाजपा को यह याद रखना चाहिए कि पिछला चुनाव पार्टी एक फीसदी वोट से हारी है, यदि यही परिस्थिति रही तो यह रेशो आगामी चुनाव में ज्यादा हो सकती है, क्योंकि जनता समझ रही है कि पैसा कहां अटक रहा है। हिमाचल का जो हिस्सा बनता है, उसे भी केंद्र सरकार देने को तैयार नहीं है।
