बिलासपुर (सुभाष ठाकुर): एक ऐसा व्रत जिसके नियम करवा चौथ से भी कठिन है। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए ही यह व्रत करती हैं। हरितालिका का व्रत जिसे पहाड़ी भाषा में चिड़ियों का व्रत भी कहा जाता हैं। यह व्रत मंगलवार और बुधवार को बड़ी धूमधाम से मनाया गया। देव भूमि हिमाचल व्रत एवं त्योहारों की धरती है, यहां पर वर्ष भर में कई व्रत त्योहार मनाए जाते हैं। जिनमें से एक हैं हरितालिका तिज चिड़ियों का व्रत और इस व्रत को महिलाएं बड़ी धूमधाम से मनाती हैं।
इस व्रत के नियम बड़े कठिन है। दो दिन तक महिलाएं अन्न जल ग्रहण नहीं करती। हालांकि करवा चौथ के दिन महिलाएं रात के समय चंद्रमा के दर्शन करके अर्ग देकर व्रत खोल लेती हैं, लेकिन हरितालिका तीज का व्रत अगले दिन खुलता है। अगले दिन पूजा-अर्चना के बाद महिलाएं व्रत खोलती है। महिलाएं ग्रुपों में इकट्ठा होकर जहां शिव पार्वती माता की पूजा करती है। वहीं पर शिव और पार्वती की मूर्तियां मिट्टी के द्वारा बनाई जाती है। सज-धज कर महिलाएं विभिन्न प्रकार के फूलों से पत्तों से फलों से भगवान शिव और पार्वती की पूजा अर्चना करती है। कहते हैं कि सर्वप्रथम माता पार्वती ने शिव भगवान को पाने के लिए यह व्रत किया था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा लगातार चलती आ रही है और महिलाएं अपने सौभाग्य की प्राप्ति के लिए अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं।
