कुल्लू : मनमिंद्र अरोड़ा- हिमाचल प्रदेश में जनहित के कार्यों के लिए अब सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एफसीए केस मामले में आदेश में बदलाव कर दिया गया है।
एफ सी ए केस को अब सुप्रीम कोर्ट में जाने की नही जरूरत
ढालपुर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजीव किमटा ने कहा कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ही आदेश जारी किया गया था कि वन भूमि के हस्तांतरण के हर मामले को सुप्रीम कोर्ट में लाना होगा। ऐसे में प्रदेश की कांग्रेस सरकार के द्वारा इस बारे सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी और अब उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजीव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार अगर सरकार को अस्पताल,, आंगनवाड़ी, स्कूल, सड़क बनानी हो। तो उसके लिए अब सुप्रीम कोर्ट में आने की आवश्यकता नहीं होगी और सरकार अपने स्तर पर इस भूमि पर ऐसे विकास कार्य को अंजाम दे सकेगी। ऐसे में विकास कार्य को तेज रफ्तार मिलेगी और एफसीए के लंबी कारवाई से निजात मिलेगी।
राजीव किमटा ने कहा कि सत्ता में आते ही सीएम सुक्खू ने आम जनता के मुद्दों को केंद्रीय स्तर पर विचार करना शुरू कर दिया है। जबकि इससे पहले यह मुद्दे लंबे समय तक लंबित रहते थे। राजीव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार सभी गारंटी को पूरा करने में जुटी हुई है और भाजपा के लोग सता जाने के बाद बिना कारण शोर मचा रखे हैं। जबकि गारंटी को पूरा करने के लिए सरकार के द्वारा बजट का प्रावधान भी किया जा रहा है। क्योंकि बिना बजट के कोई भी योजना को पूरा नहीं किया जा सकता है।
