संजु चौधरी,शिमला: विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भी विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। प्रश्नकाल शुरू होने से पहले विपक्ष ने संस्थानों को बंद करने के निर्णय का विरोध किया। हिमाचल प्रदेश में संस्थानों को डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पर विपक्ष ने चर्चा मांगी। नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव को अध्यक्ष ने मंजूरी दी, जिसके बाद सदन में डिनोटिफाई किए संस्थानों को लेकर चर्चा जारी हैं। वहीं सीएम ने स्थगन प्रस्ताव को गैर जरूरी बताकर विपक्ष पर निशाना साधा हैं।
विपक्ष की ओर से मांगी गई चर्चा को लेकर सीएम ने निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष हर रोज विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव लेकर आ रहा हैं। संस्थानों के डिनोटिफाई करने को लेकर चर्चा मांगी जा रही हैं लेकिन तथ्यों के साथ चर्चा नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि चर्चा करनी थी तो सदन में यह भी बताते कि इन संस्थानों के लिए कितने बजट का प्रावधान किया गया था। जिन स्कूलों में दो बच्चे हैं उनमें पांच टीचर थे। विपक्ष सदन में तथ्य पेश करने के बजाए भाषण बाजी कर रहा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा की हम भी चाहते हैं कि जिस मुद्दे पर विपक्ष चर्चा चाह रहा है उस मुद्दे पर चर्चा हो लेकिन विपक्ष को चाहिए कि वह तथ्यों के साथ सदन में बात करें। उन्हें यह पता हो कि कहां संस्थान की आवश्यकता है और कहां नहीं। कहां संस्थान खुलना चाहिए, कहां डिस्पेंसरी खुलनी चहिए इस बारे में विपक्ष को तथ्यों के साथ बातचीत करनी चाहिए। मात्र भाषण बाजी ही भाजपा के विधायक सदन में कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषण के माध्यम से प्रशासनिक फ़ैसले नहीं लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सोच-समझकर ही संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया हैं । उन्होंने यह भी कहा कि जहां आवश्यकता होगी वहां संस्थानों को खोला जाएगा।
