कांगड़ा,गुलशन धनोहा-: हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोक आस्था और धार्मिक परंपरा से जुड़ा गुग्गा नवमी का पर्व शनिवार, 5 सितंबर 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। जाहरवीर गुग्गा महाराज को समर्पित इस पर्व को लेकर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देहरा के दियाड़ा गांव स्थित गुगा मंदिर में भी गुग्गा नवमी के अवसर पर विशेष आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
गुग्गा नवमी से पहले ही क्षेत्र के कई गांवों में गुग्गा जाहरवीर की गाथा गाने वाली मंडलियां घर-घर पहुंच रही हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ मंडली के सदस्य जाहरवीर की वीरगाथा का गायन कर लोगों को उनकी लोकगाथाओं से परिचित कराते हैं। श्रद्धालु भी इस धार्मिक परंपरा में अपनी श्रद्धा के अनुसार अनाज, वस्त्र और धनराशि भेंट करते हैं। माना जाता है कि यह परंपरा रक्षाबंधन के आसपास शुरू होकर गुग्गा नवमी तक चलती है।
लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं गुग्गा महाराज
लोक मान्यता में गुग्गा महाराज को जाहरवीर, गुग्गा पीर और जाहरपीर के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें वीरता, लोककल्याण और सर्पों से रक्षा करने वाले लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। उनकी आस्था किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि हिमाचल सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों के लोग उन्हें श्रद्धापूर्वक मानते हैं।गुग्गा नवमी के दिन गाथा गायन की परंपरा अपने चरम पर पहुंचती है। विभिन्न गांवों की मंडलियां गुग्गा मंदिरों में एकत्र होकर पूजा-अर्चना, आरती और सामूहिक गाथा गायन करती हैं। कई स्थानों पर इस अवसर पर मेलों का आयोजन भी होता है, जिससे धार्मिक उत्सव के साथ ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं की भी झलक देखने को मिलती है।

