शिमला-: हिमाचल प्रदेश की पहचान देशसेवा और सैन्य परंपरा से गहराई से जुड़ी है। प्रदेश की पीढ़ियों ने सेना में शामिल होकर राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी गौरवशाली परंपरा को सम्मान देते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सैनिक परिवारों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।हिमाचल के वीर सैनिकों के नाम अब तक 1,252 वीरता पुरस्कार दर्ज हैं। इनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र, 10 महावीर चक्र, 25 कीर्ति चक्र, 58 वीर चक्र, 102 शौर्य चक्र और 1,051 अन्य आर्मी मेडल शामिल हैं। कांगड़ा के मेजर सोमनाथ शर्मा देश के पहले परमवीर चक्र विजेता रहे हैं।
पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी सेवाओं में 15 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। यह सुविधा क्लास-Ⅰ से क्लास-Ⅳ तक के पदों में उपलब्ध है। सैनिक कल्याण विभाग में विशेष रोजगार प्रकोष्ठ भी स्थापित किया गया है, जो पूर्व सैनिकों को रोजगार तलाशने में सहायता करता है।युद्ध विधवाओं और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ उनकी बेटियों के विवाह के लिए 50 हजार रुपये की मदद दी जाती है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के गैर-पेंशनभोगी पूर्व सैनिकों को 10 हजार रुपये मासिक वृद्धावस्था पेंशन, जबकि उनकी विधवाओं को 5 हजार रुपये प्रतिमाह सहायता दी जाती है।दिव्यांग पूर्व सैनिकों को पुनर्वास केंद्रों में रहने के दौरान एक लाख रुपये वार्षिक सहायता दी जाती है। सैनिक परिवारों के बच्चों को विभिन्न उच्च एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 500 से 1,000 रुपये मासिक छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है।
वीरता पुरस्कार विजेताओं को 30 लाख रुपये तक का वित्तीय अनुदान तथा विशिष्ट सेवा पुरस्कार विजेताओं को 3,000 से 17,000 रुपये तक के लाभ दिए जाते हैं। वीरता पुरस्कार विजेताओं और पात्र विधवाओं को एचआरटीसी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलती है।प्रदेश में 1,33,557 पूर्व सैनिक, 40,004 सैन्य विधवाएं और 991 युद्ध विधवाएं हैं। सरकार का उद्देश्य है कि राष्ट्रसेवा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान के साथ सुरक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर मिलते रहें।
