मंडी, धर्मवीर-:मुख्यमंत्री विधवा, एकल, निराश्रित और दिव्यांग महिला आवास योजना के तहत मंडी जिला की 16 एकल नारियों के पक्के घर बनाने का सपना अब साकार हो रहा है। हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से पात्र महिलाओं को मकान निर्माण के लिए तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का लाभ उन महिलाओं को दिया जा रहा है, जिन्होंने मनरेगा में 100 दिनों का कार्य पूरा किया है।
पक्के आशियाने के लिए मिल रही आर्थिक मदद
योजना के तहत पधर तहसील के गांव सुराहन की कुसमा देवी और सियूंह गांव की पदमा देवी को भी आर्थिक सहायता स्वीकृत हुई है। दोनों महिलाओं ने बताया कि उनके पति का देहांत हो चुका है और परिवार का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने परिवार को संभाला और मनरेगा में काम कर योजना के लिए पात्रता हासिल की।
कुसमा देवी और पदमा देवी ने बताया कि प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत उन्हें पक्का मकान बनाने के लिए तीन लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। दोनों लाभार्थियों को सहायता राशि की दो किस्तें मिल चुकी हैं, जबकि तीसरी किस्त मिलना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि कच्चे मकान में रहने के दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब पक्का घर बनने की उम्मीद से उनके जीवन में नई खुशी आई है।
लाभार्थियों ने जताया सरकार का आभार
लाभार्थी महिलाओं ने प्रदेश सरकार और हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड का आभार जताया है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और अकेले जीवन का सामना कर रही महिलाओं के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण है। पक्का घर मिलने से उन्हें न केवल सुरक्षित छत मिलेगी, बल्कि परिवार के भविष्य को लेकर चिंता भी कम होगी।
मंडी जिला में 16 महिलाओं को मिली स्वीकृति
मंडी जिला में मुख्यमंत्री विधवा, एकल, निराश्रित और दिव्यांग महिला आवास योजना के तहत कुल 16 एकल नारियों के लिए तीन-तीन लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इनमें से चार महिलाओं को दो-दो किस्तें जारी की जा चुकी हैं। वहीं, 12 महिलाओं को 15 अगस्त 2026 को योजना की पहली किस्त प्रदान की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है। मकान निर्माण की प्रगति के आधार पर लाभार्थियों को अगली किस्तें उपलब्ध करवाई जाएंगी। इससे महिलाओं को निर्माण कार्य पूरा करने में आर्थिक मदद मिलेगी और उन्हें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मनरेगा में 100 दिन का काम जरूरी
इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र महिलाओं का मनरेगा में 100 दिनों का कार्य पूरा करना आवश्यक है। सरकार की ओर से योजना को मनरेगा और भवन एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड से जोड़कर जरूरतमंद महिलाओं तक सहायता पहुंचाई जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली एकल महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ आवास की सुविधा भी मिल रही है।
योजना से लाभान्वित महिलाओं का कहना है कि पहले बारिश और सर्दियों के मौसम में कच्चे मकान की वजह से उन्हें काफी परेशानी होती थी। अब पक्का घर बनने के बाद परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सकेगा। जिला में शुरू हुई यह पहल अन्य जरूरतमंद महिलाओं के लिए भी उम्मीद की किरण बनी है।सरकार की इस योजना ने मंडी जिला की 16 एकल नारियों के जीवन में बदलाव की नई शुरुआत की है। कच्चे मकानों से पक्के आशियानों की ओर बढ़ता यह सफर उनके आत्मविश्वास और सम्मान को मजबूत कर रहा है।
