राहुल चावला, धर्मशाला-:चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे और आयात पर बढ़ती निर्भरता को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुनील बरसैन ने कहा कि चीन से लगातार बढ़ रहा आयात और उसके मुकाबले भारत का कम निर्यात देश के लिए चिंता का विषय है।सुनील बरसैन ने व्यापार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2020-21 में भारत ने चीन से करीब 65 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था, जबकि इसी अवधि में चीन को भारत का निर्यात करीब 21 बिलियन डॉलर था। उनके अनुसार वर्ष 2025 में चीन से भारत का आयात बढ़कर लगभग 132 बिलियन डॉलर पहुंच गया, जबकि भारत का चीन को निर्यात घटकर 19.47 बिलियन डॉलर रह गया।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2025 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा करीब 115 बिलियन डॉलर रहा। कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि चालू वर्ष में यह घाटा करीब 135 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि व्यापार में यह अंतर चीन पर भारत की आर्थिक निर्भरता को लेकर गंभीर चर्चा की जरूरत को सामने लाता है।पत्रकार वार्ता में गलवान घाटी की घटना का भी जिक्र किया गया। सुनील बरसैन ने कहा कि 15 जून 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। उन्होंने कहा कि उस समय चीन के प्रति सख्त नीति अपनाने की बात कही गई थी, लेकिन शहीद परिवारों की अपेक्षाएं आज भी बनी हुई हैं।उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में चीन की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि कई वर्षों बाद चीन के राष्ट्रपति का भारत की धरती पर आना भारत-चीन संबंधों को लेकर चर्चा का विषय है। उनके मुताबिक ऐसे समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक निर्भरता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पिछले 21 वर्षों से कांग्रेस संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों के सहयोग के लिए आभार भी जताया।इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर भी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में कांग्रेस के कार्यालय नहीं हैं या किराये की इमारतों से संगठन का काम चल रहा है। इसके विपरीत उन्होंने भाजपा और संघ के कार्यालयों के विस्तार का जिक्र करते हुए वहां आधुनिक सुविधाएं होने का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे कार्यालयों में पत्रकारों और यूट्यूबरों के प्रवेश को लेकर भी प्रतिबंध रहते हैं।

