संजू, शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता महासंघ (हिमफेड) के चेयरमैन महेश्वर चौहान ने शिमला शहरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। पीटरहॉफ में हिमफेड के निदेशक मंडल की बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी दावेदारी के पक्ष में संगठन में लंबे समय तक किए गए कार्यों का हवाला दिया। उनकी इस घोषणा के बाद शिमला शहरी सीट पर कांग्रेस के भीतर संभावित दावेदारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
वर्तमान में शिमला शहरी विधानसभा सीट से कांग्रेस के हरीश जनारथा विधायक हैं। महेश्वर चौहान ने कहा कि चुनाव में दावेदारी करना हर उस कार्यकर्ता का अधिकार है, जिसने संगठन के लिए निष्ठा से काम किया हो। उन्होंने बताया कि वह पिछले 35 वर्षों से कांग्रेस संगठन से जुड़े हुए हैं। इस दौरान उन्होंने एनएसयूआई, युवा कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और उपाध्यक्ष रहने के साथ निर्वाचित पार्षद भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार के विभिन्न बोर्डों में सदस्य के रूप में भी सेवाएं दी हैं।
महेश्वर चौहान ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान शिमला शहरी सीट के लिए केंद्रीय चुनाव समिति को भेजे गए तीन नामों में उनका नाम भी शामिल था। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधायक भी अपना काम कर रहे हैं और वह स्वयं संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इससे पहले भी महेश्वर चौहान अपने जन्मदिन पर समर्थकों के साथ रैली निकालकर राजनीतिक सक्रियता दिखा चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी उन्हें इस सीट से एक दावेदार के रूप में देखा गया था।
शिमला के विकास पर अपनी बात रखते हुए महेश्वर चौहान ने कहा कि शहर का ऐतिहासिक विकास कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिमला के निवासी रहे हैं और दो बार पार्षद के रूप में भी काम कर चुके हैं। ऐसे में शहर की समस्याओं और जरूरतों को लेकर उनकी विशेष समझ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिमला के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
हालांकि, शिमला शहरी सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। महेश्वर चौहान की दावेदारी के बाद पार्टी के भीतर टिकट को लेकर होने वाली आगामी गतिविधियों पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

