Dharamshala, Rahul-:धर्मशाला—तपोवन से चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान शुक्रवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच शब्दों की तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और सुलह से विधायक विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि सत्र के दौरान तीन दिनों में जनता और फरियादियों की अपेक्षित उपस्थिति नहीं दिखी, जिससे उनके अनुसार सरकार के प्रति लोगों में असंतोष झलकता है। परमार ने कहा कि जनता परिवर्तन के मूड में दिखाई दे रही है।
परमार ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस संदर्भ में संघ (आरएसएस) को लेकर टिप्पणियाँ की गईं, वह उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संघ देश में सामाजिक योगदान और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ कार्य करने वाला संगठन है। परमार ने दावा किया कि विभाजन के समय आरएसएस ने धार्मिक आधार पर बंटवारे का विरोध किया था और अखंड भारत की अवधारणा का समर्थन करता रहा है। उन्होंने कहा कि नेगी के बयानों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की गई है।
कर्मचारी मुद्दों पर परमार ने कहा कि कई सेवानिवृत्त कर्मचारी तीन वर्षों से लंबित लाभों और मेडिकल बिलों के भुगतान का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इन मुद्दों को सदन के अंदर और बाहर उठाती रहेगी।
उधर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक रंग देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान कई बार स्पीकर द्वारा दी गई सलाह के बावजूद विपक्ष नियमों का पालन नहीं कर रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबा सत्र इसलिए बुलाया गया है ताकि हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हो सके, लेकिन विपक्ष मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रहा है।सुक्खू ने कहा कि सदन में भाजपा विधायकों का शक्ति प्रदर्शन उनकी आंतरिक राजनीतिक खींचतान को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को दोपहर बाद कुछ विधायक सदन से चले भी गए। पेंशनरों की मांगों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उनकी समस्याओं से अवगत है और दिसंबर के बाद उनसे विस्तृत बातचीत की जाएगी।विधानसभा परिसर में जारी राजनीतिक गर्माहट के बीच कर्मचारी और पेंशनर मुद्दे प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
