Dharamshala, Rahul-:राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत उपायुक्त कार्यालय स्थित एनआईसी सभागार में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।बैठक में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की गई तथा ब्लैक स्पॉट्स की पहचान, जन-जागरूकता अभियानों, राहत एवं बचाव व्यवस्था और राह-वीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।
एडीसी विनय कुमार बोले— दुर्घटनाओं में कमी लाना सर्वोच्च प्राथमिकता
अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण मानवीय लापरवाही है। ओवर-स्पीडिंग, नशे की हालत में वाहन चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग और यातायात नियमों की अनदेखी जैसे कारणों से लगभग 93 प्रतिशत दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं 45 से 50 प्रतिशत दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज की जा रही हैं।उन्होंने जानकारी दी कि जिले में अब तक 118 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए जा चुके हैं। इनकी निगरानी और सुधार के लिए उप-मंडल स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, जिनमें पुलिस और लोक निर्माण विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी ब्लैक स्पॉट्स पर शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
राह-वीर योजना के बारे में जानकारी देते हुए एडीसी ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे राह-वीरों को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी सम्मानित किया जाएगा। योजना के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये तक की राशि दी जाती है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर चयनित राह-वीर को एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।अतिरिक्त उपायुक्त ने चालकों की नियमित आई-टेस्टिंग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी चालक की अस्वस्थता दुर्घटना का कारण बन सकती है। विशेष रूप से स्कूल बस चालकों की नियमित नेत्र जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि जिले में विभिन्न स्कूलों में कुल 1784 स्कूल बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें प्रतिदिन हजारों बच्चे सफर करते हैं।उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा।अस्पतालों और स्कूलों के आसपास सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग विकसित की जाएंगी, ताकि बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। इसके लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्यु दर हासिल करना है, जिसके लिए सभी विभागों के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है।
