Chamba, Manjur Pathan-:हिमाचल प्रदेश जहां एक ओर हाल की भारी बारिश और आपदाओं से उबरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चंबा जिले के तीसा और छतरी ब्लॉक में कथित तौर पर सरकारी भूमि से कश्मल (झाड़ियां/वनस्पति) उखाड़े जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी भूमि की आड़ लेकर रात के अंधेरे में सरकारी जमीन से बड़े पैमाने पर कश्मल निकाला जा रहा है, जिससे भविष्य में गंभीर प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश में अभी भी आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है, इसके बावजूद सरकार द्वारा निजी भूमि से कश्मल निकालने की अनुमति दी गई है। इसी अनुमति का गलत फायदा उठाकर कुछ लोग सरकारी और वन भूमि से भी अवैध रूप से कश्मल निकाल रहे हैं। आरोप है कि यह सारा काम रात के समय ट्रकों और गाड़ियों के जरिए किया जा रहा है, जबकि वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही।ग्रामीणों का कहना है कि कश्मल मिट्टी को बांधकर रखने में अहम भूमिका निभाती है और भूस्खलन जैसी आपदाओं को रोकने में सहायक होती है। सरकारी जमीन से कश्मल हटाए जाने से इलाके में भविष्य में भारी नुकसान होने की आशंका है, खासकर तब जब हाल ही में बरसात के दौरान क्षेत्र को पहले ही भारी क्षति झेलनी पड़ी है।
छतरी ब्लॉक के लोगों ने अब इस कथित अवैध गतिविधि के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने ठेकेदारों और वन विभाग को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकारी जमीन से कश्मल निकाला गया तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगे। लोगों का कहना है कि कानून के अनुसार निजी भूमि से कश्मल निकालने का 60-40 का अनुपात तय है, लेकिन सरकारी भूमि से कश्मल निकालना पूरी तरह गैरकानूनी है।
वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे रात को पहरा देने के लिए मजबूर हैं और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले की शिकायत उच्च स्तर तक करेंगे। लोगों का आरोप है कि एक तरफ सरकार आपदा को लेकर चिंता जताती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे फैसले भविष्य की आपदाओं को न्योता दे रहे हैं।
