बिलासपुर/सुभाष ठाकुर: नगर परिषद घुमारवीं में अम्बेडकर भवन के रखरखाव के अभाव के चलते बरसों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नगर परिषद घुमारवीं करीब आठ महीने पहले अपनी एक बैठक में इस भवन के जीर्णोद्धार को लेकर चर्चा करने के बाद सर्वसम्मति से इसकी मरम्मत के कार्य पर मुहर लगाई थी। लेकिन वह मोहर केवल कागजों तक ही सीमित रह गई और सर्वसम्मति से बनी सहमति भी अंबेदकर भवन के दयनीय हालत को सुधारने का रास्ता नहीं खोज पाई और आज हालत यह है कि लाखों रुपए खर्च करके बनाए गए।
इस भवन में कबाड़ इकट्ठा करके रखा जा रहा है। करीब आठ महीने का वक्त बीत जाने के बाद भी नगर परिषद इस की जर्जर हालत में कोई सुधार नहीं कर पाया है। जिससे साफ पता चलता है कि बैठक में की गई चर्चा व सर्वसम्मति से पारित किए गए प्रस्ताव मात्र कागजों तक ही सीमित रहते हैं। नगर परिषद की शायद ही कोई ऐसी योजना हो जो सिर चढ़ पाती हो। और उसका सशक्त उदाहरण आज अंबेदकर भवन के रूप में सबके सामने है। बता दे कि करीब 12 वर्ष पहले बने इस भवन से स्थानीय लोगों को आज तक कोई लाभ नहीं मिल पाया है।
इस अंबेदकर भवन का शिलान्यास 2009 में तत्कालीन सांसद अनुराग ठाकुर ने किया था तथा उस समय सरकार ने इस भवन निर्माण के लिए करीब दस लाख रुपये का बजट का प्रावधान किया था। हालांकि इस राशि से तब केवल ढांचा ही खड़ा हो पाया था। इसके बाद पांच लाख रुपये का अतिरिक्त बजट का प्रावधान करने के बाद 2011 में इस भवन का निर्माण कार्य पूरा किया जा सका था। कुछ समय बाद इसका सारा जिम्मा नगर परिषद के अधीन आ गया था। हैरानी की बात तो यह है कि बीते 12 वर्षों में इस भवन में एक भी कार्यक्रम नहीं हो पाया था जिस कारण यह भवन आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। जबकि नगर परिषद चाहती तो इसका जीर्णोद्धार कर इसे लोगों को समर्पित कर यहां पर सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन करवा कर अपने लिए आय का साधन बना सकती थी।
