शिमला: आईजीएमसी में कांट्रेक्ट वर्कर्स का डियूटी रोस्टर ना बनाने और डियूटियों को लेकर की जा रही धांधलियों के खिलाफ़ आईजीएमसी कांट्रेक्ट वर्करज़ यूनियन ने प्रदर्शन का एलान कर दिया है। यूनियन की ओर से 30 अगस्त को आईजीएमसी के मजदूरों की मांगों को अस्पताल के बाहर विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन की रणनीति बनाने के लिए आज सम्मेलन का आयोजन भी आईजीएमसी कांट्रेक्ट वर्करज़ यूनियन शिमला संबंधित सीटू का वार्षिक सम्मेलन सीटू कार्यालय शिमला में आयोजित किया गया।
सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि आईजीएमसी के मजदूरों की मांगों को लेकर 30 अगस्त को अस्पताल के बाहर मजदूर विशाल प्रदर्शन करेंगे। सम्मेलन में उन्नीस सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया जिसमें वीरेंद्र लाल को अध्यक्ष,सीता राम को महासचिव,जय कुमार को कोषाध्यक्ष,सुरेन्द्रा,सरीना,मीना को उपाध्यक्ष,निशा को सचिव,संजीव,विद्या गाज़टा,लेखराज,पमीश,सीमा,विद्या देवी,पूनम,तारा,प्रवीण व पिंकी को कमेटी सदस्य चुना गया।
सम्मेलन को सीटू नेता विजेंद्र मेहरा,अजय दुलटा,रमाकांत मिश्रा,बालक राम ने संबोधित किया। उन्हों आईजीएमसी प्रबंधन व ठेकेदार पर सफाई कर्मचारियों का जमकर शोषण करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी में डयूटियों को लेकर भाई – भतीजावाद चल रहा है व कोई भी रोस्टर नहीं बनाया गया है। ओवरटाइम डियूटी
भी चुनिंदा लोगों को ही दी जा रही है। प्रबंधन के चहेते डबल डियूटी करने वाले मजदूरों से डियूटी केवल पांच घंटे ली जा रही है जबकि अन्य मजदूरों का भारी शोषण जारी है।
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि देश व प्रदेश का कानून कहता है कि डयूटी के लिए रोस्टर बनना अनिवार्य है। वर्षों से अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में कोई रोस्टर नहीं बन रहा है व न ही यह लागू हो रहा है। आईजीएमसी प्रशासन व प्रबंधन को वर्षों से क्या यह बात मालूम नहीं है। यह सब मिलीभगत से हो रहा है। मजदूरों के शोषण में आईजीएमसी प्रबंधन व ठेकेदार दोनों सहभागी है। मज़दूरों की मांगों के समाधान के बजाए उनके डयूटी टाइम को एक घंटा बढ़ा दिया गया है। मजदूरों को कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम व खाना खाने के लिए अलग से कमरे अथवा मेस की कोई व्यवस्था नहीं है। मजदूरों को कोरोना काल का प्रतिदिन दो सौ रुपए स्पेशल वेतन दो वर्षों बाद भी दिया नहीं गया है। मजदूरों से अपनी श्रेणी के अलावा अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है लेकिन उन्हें इसकी एवज में कोई वेतन नहीं मिल रहा है। जनरल डयूटी में कार्य करने वाले मजदूरों का वेतन पांच सौ रुपये कम कर दिया गया है। मजदूरों को न तो दो वर्दी सैट दिए जा रहे हैं और न ही उसकी सिलाई के पैसे दिए जा रहे हैं। उन्हें ओवरकोट,जूते,दस्ताने,मास्क व अन्य उपकरण उचित मात्रा में नहीं दिए जा रहे है। मजदूरों की डयूटियां मनमर्जी से बदली जा रही है। जो भी मजदूर अपने शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाते हैं उन्हें न्याय देने के बजाए नौकरी से बाहर निकाल दिया जाता है।
मेहरा ने यह भी आरोप लगाया है कि अपनी मांगों को बुलंद करने वाले मजदूरों को आईजीएमसी में ठेकेदारों व उनके सुपरवाइजरों की ओर से डराया – धमकाया जाता है व उन्हें सरेआम धमकियां दी जाती है। इस सारे घटनाक्रम पर आईजीएमसी प्रशासन मौन रहता है। इस से साफ है कि आईजीएमसी में ठेकेदारों व प्रशासन की खुली मिलभगत चल रही है व कमीशनखोरी का धंधा चरम पर है जिसका शीघ्र ही भंडाफोड़ किया जाएगा। उन्होंने चेताया है कि अगर मजदूरों की मांगों को हल न किया गया तो सीटू के बैनर तले मजदूर आईजीएमसी में वर्ष 2019 की तर्ज़ पर एक बड़े आंदोलन की राह पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने आईजीएमसी प्रबंधन से मांग की है कि मजदूरों की मांगों का समाधान करने के लिए तुरंत मजदूरों,ठेकेदारों व आईजीएमसी प्रबंधन की त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जाए।
