Chamba, Manjur Pathan-: हिमाचल प्रदेश सरकार की नशामुक्ति अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग अब पंचायत स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने जा रहा है। चंबा जिले के तीसा विकास खंड में आने वाली सभी 53 पंचायतों में नशा-निवारण समितियां बनाई जाएंगी, जो गांव-गांव जाकर जागरुकता गतिविधियाँ संचालित करेंगी।
समिति का संरचना मॉडल तैयार कर दिया गया है। इसके अनुसार प्रत्येक पंचायत में स्थानीय स्कूल के प्रभारी को समिति का अध्यक्ष बनाया जाएगा। वहीं पंचायत सचिव, पटवारी, आशा कार्यकर्ता, महिला मंडल, युवक मंडल तथा अन्य सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि समिति के सदस्य होंगे। यह टीमें स्कूलों, वार्डों और गांवों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता फैलाएंगी और युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए सामाजिक सहयोग सुनिश्चित करेंगी।अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में लगातार बढ़ रही नशे की चुनौतियों को देखते हुए अब आवश्यकता है कि स्थानीय समुदाय स्वयं जागरूक होकर जिम्मेदारी निभाए। पंचायत स्तर पर बन रही समितियों के माध्यम से न केवल युवा, बल्कि अभिभावकों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक भी संदेश पहुंचाया जाएगा।
बीडीओ तीसा अरविंद कुमार ने दी जानकारी
खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) तीसा, अरविंद कुमार, ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह कदम नशे के खिलाफ एक संगठित और व्यापक अभियान की दिशा में बड़ा प्रयास है। उन्होंने बताया:“तीसा विकास खंड की सभी 53 पंचायतों में नशा-निवारण समितियों का गठन किया जा रहा है। इन समितियों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना है। स्कूल प्रभारी अध्यक्ष होंगे, जबकि पंचायत सचिव, पटवारी, आशा कार्यकर्ता, महिला मंडल, युवक मंडल और अन्य संस्थाएं समिति का हिस्सा होंगी। नशे से प्रभावित हो रही युवा पीढ़ी को बचाना हमारी प्राथमिकता है, इसलिए गांव-गांव तक संदेश पहुंचाया जाएगा।उन्होंने कहा कि समितियां स्कूलों में विशेष कार्यक्रम, गांव में जागरूकता रैलियाँ, घर-घर संवाद, नाटक, पोस्टर अभियान और परामर्श सत्र भी आयोजित करेंगी। जरूरत पड़ने पर नशे से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्ट प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि गांवों में नशे की रोकथाम तभी संभव है जब समाज, प्रशासन और पंचायत तीनों मिलकर काम करें।
