Shimla, Sanju-शिमला में आयोजित सेना प्रशिक्षण कमान (आरट्रैक) अलंकरण समारोह 2025 के दौरान भविष्य की युद्ध रणनीतियों और तकनीकी आधुनिकीकरण को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। इस समारोह की अध्यक्षता सेना प्रशिक्षण कमान के जीओसी-इन-सी, लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम ने की। प्रशिक्षण वर्ष 2023-24 के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिष्ठानों और कार्मिकों को सम्मानित किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि बदलते समय में युद्ध की परिभाषा भी बदल रही है। ड्रोन और अन्य उन्नत तकनीकों का युद्ध में प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 तक सेना को 33 नई तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें ड्रोन प्रमुख भूमिका निभाएंगे। इसके लिए 15 बड़े प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों को विशेषज्ञता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सेना में तकनीकी दक्षता और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आरट्रैक द्वारा 57 नई पहलों की शुरुआत की गई है, जिन पर कुल 390 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में अब तक 18,000 सैनिकों को आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित किया गया है, जबकि अगले वर्ष 12,000 अतिरिक्त जवानों को प्रशिक्षित करने की योजना है।उन्होंने कहा कि यह सभी पहल भारतीय सेना को “फ्यूचर-रेडी फोर्स” बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम हैं। लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने महिलाओं की भूमिका का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान में 1800 से अधिक महिलाएं भारतीय सेना में विभिन्न रैंक व भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दे रही हैं।समारोह में तीन श्रेणी ‘ए’ प्रतिष्ठानों और उनसे संबद्ध दो इकाइयों को ‘जीओसी-इन-सी सेना प्रशिक्षण कमान इकाई प्रशस्ति पत्र’ से सम्मानित किया गया।
