Shimla,Sanju-हिमाचल प्रदेश सरकार ने लाहौल-स्पीति जैसे जनजातीय क्षेत्रों में एस्ट्रो टूरिज्म (तारामंडल पर्यटन) को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की है। साफ, स्वच्छ और प्रदूषण रहित वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब पर्यटक चांद-तारों को निहारने का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को राज्य सचिवालय शिमला में इस योजना की शुरुआत करते हुए दो लाभार्थियों को टेलीस्कोप प्रदान किए। योजना के तहत पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लाहौल-स्पीति के आठ युवाओं को टेलीस्कोप दिए जाएंगे, साथ ही उन्हें इनके संचालन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल एस्ट्रो टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर भी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, “पर्यटन से जुड़े लाभार्थी इन टेलीस्कोप के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित कर सकेंगे और उन्हें तारों व ग्रहों का नज़दीक से दीदार कराने का मौका मिलेगा।”
स्थानीय युवाओं में उत्साह
स्पीति घाटी के लांगजा गांव की टशी युडोन ने टेलीस्कोप मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि इतने महंगे उपकरण को वे खुद नहीं खरीद सकती थीं। सरकार की इस पहल से न केवल उन्हें बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यटन व्यवसाय को लाभ मिलेगा।टशी युडोन ने कहा“यह टेलीस्कोप हमारे जैसे लोगों के लिए एक बड़ा अवसर है। पर्यटक इससे आकर्षित होंगे और हमारा व्यवसाय बढ़ेगा,”
वहीं रंगरिक रौगटौग के उरगेन छेरिग, जो पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हैं, ने भी टेलीस्कोप मिलने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने बताया कि स्पीति घाटी का वातावरण एस्ट्रो टूरिज्म के लिए बेहद उपयुक्त है, और इस नई सुविधा से क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
सरकार की मंशा
प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य न केवल क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना भी है। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य पर्यटक स्थलों पर भी अपनाए जाने की संभावना है।
