Nahan,4 September-सिरमौर जिला के नौहराधार के समीप कदयोन गांव स्थित प्राचीन विजट मंदिर में गत 2 सितंबर की मध्यरात्रि को एक अप्रत्याशित घटना घटी। ग्रामीणों के अनुसार, रात्रि लगभग 2 बजे मंदिर के भीतर अचानक नौबत बजनी शुरू हो गई, जबकि उस समय वहां कोई बाजगी (वादक) मौजूद नहीं था। मंदिर प्रांगण से उठी यह ध्वनि आसपास के कई लोगों ने स्पष्ट रूप से सुनी।
मंदिर में पुजारी व ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी रहस्यमयी घटना
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि ऐसे चमत्कारिक घटनाक्रम इस मंदिर में प्राचीन काल से होते आए हैं, किंतु आधुनिक दौर में इस तरह की घटना समाज के लिए अत्यंत आश्चर्यजनक है।क्षेत्र के प्रबुद्धजनों और विभिन्न मंदिरों के पुजारियों का मत है कि हिमाचल देवभूमि कहलाती है और यहां देवी-देवताओं के प्रति अटूट आस्था ही ऐसी दिव्य घटनाओं का कारण है। पंचायत समिति संगड़ाह के पूर्व अध्यक्ष मेला राम शर्मा ने बताया कि क्षेत्र के लोक इतिहास और गाथाओं में ऐसे अनेक उल्लेख मिलते हैं जब देवालयों में अलौकिक घटनाएं घटित हुईं।उन्होंने एक पारंपरिक गीत का हवाला देते हुए कहा— “किले दे कदोयणो, बोलो पाणी रे दीवे रे नाराणा, पूजा कोरणी बिजटो री” —यह गीत इसी मंदिर से जुड़ा हुआ है और उस समय का वर्णन करता है जब यहां स्वयं पानी के दीये प्रज्वलित हो जाते थे।
शर्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में घटती आस्था और देवालयों की पवित्रता पर पड़ रहे आघात के कारण देवशक्ति भी कमजोर हो रही है। उनके अनुसार, देवी-देवताओं की उपेक्षा और पवित्रता के साथ खिलवाड़ ही प्राकृतिक आपदाओं, बादल फटने जैसी घटनाओं और विनाशकारी परिस्थितियों का एक बड़ा कारण है।उन्होंने आह्वान किया कि यदि समाज ने समय रहते अपने देवी-देवताओं की आस्था और मंदिरों की मर्यादा को सुरक्षित रखने के प्रयास नहीं किए तो भविष्य में और भी भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
