धर्मशाला परिसर के निर्माण को लेकर फिर गरमाई सियासत, 20 करोड़ रुपये देने के मुख्यमंत्री के बयान पर उठाए सवाल
देहरा और धर्मशाला के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाने का आरोप, हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने की मांग
राहुल चावला | धर्मशाला-:हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर के निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से विश्वविद्यालय के लिए 20 करोड़ रुपये देने की बात कहे जाने के बाद समाजसेवी अतुल भारद्वाज ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति विशेष का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के हितों और टैक्स के पैसे से जुड़ा विषय है। ऐसे में सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए।
अतुल भारद्वाज ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय को मुद्दा नहीं बताया था। भारद्वाज ने कहा कि यह मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत सोच हो सकती है, लेकिन विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर को लेकर लंबे समय से लोग संघर्ष कर रहे हैं। इस मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन भी हुए हैं। ऐसे में इसे गैरजरूरी बताना जनता की भावनाओं की अनदेखी करने जैसा है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। कभी 20 करोड़ तो कभी 30 करोड़ रुपये देने की बात कही जाती है। इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक ऐसी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितनी राशि देय है और भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है। उन्होंने सरकार से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
देहरा और धर्मशाला के लिए अलग नियम क्यों?
अतुल भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री 20 करोड़ रुपये देने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ बिजली और पानी के खर्च केंद्र सरकार की ओर से उठाने की शर्त भी रखी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब देहरा परिसर के संबंध में प्रदेश सरकार खर्च वहन कर रही है, तो धर्मशाला परिसर के मामले में अलग व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है? उनके अनुसार, दोनों परिसरों के संबंध में सरकार का रुख स्पष्ट और समान होना चाहिए।
हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने की मांग
भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि यदि सरकार वास्तव में 20 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है, तो उसे हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में अदालत के समक्ष जवाब देने में देरी हो रही है और संबंधित अधिकारी भी समय पर अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की। हालांकि, अदालत की अवमानना से संबंधित उनका आरोप उनका अपना दावा है, जिस पर आधिकारिक न्यायिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
जनता के पैसे का मामला, राजनीति तक सीमित न रहे मुद्दाअतुल भारद्वाज ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए धन की मांग किसी व्यक्ति के निजी लाभ के लिए नहीं की जा रही है। यह जनता के टैक्स से जुड़े संसाधनों और प्रदेश में उच्च शिक्षा के विकास का सवाल है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक बयान देने के बजाय इस मामले का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।उन्होंने बताया कि अब इस मामले में प्रदेश सरकार को भी अदालत में पक्षकार बनाया गया है और आगे की लड़ाई कानूनी तरीके से लड़ी जाएगी। भारद्वाज ने कहा कि सरकार के फैसलों और कार्यप्रणाली का आकलन जनता करेगी।

