राहुल चावला, धर्मशाला : प्रदेश में अब आयुर्वेदिक चिकित्सक भी निक्षय पोर्टल पर टीबी मरीजों की जानकारी अपलोड करेंगे। अभी तक आयुर्वेदिक चिकित्सकों को यह कार्य नहीं दिया गया था लेकिन अब टीवी मुक्त भारत के लक्ष्य को समय पर पूरा करने के दृष्टिगत यह फैसला लिया गया हैं ओर आयुष चिकित्सकों को भी इस अभियान में जोड़ा गया हैं।
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, जिला कांगड़ा डॉ. रश्मी अग्निहोत्री ने बताया कि अब आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले टीबी मरीजों की जानकारी आयुर्वेदिक चिकित्सक निक्षय पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसके लिए आयुर्वेदिक अधिकारियों व चिकित्सकों के निक्षय आईडी जनरेट किए गए हैं। आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटर में जो भी टीबी मरीज आते थे आयुष विभाग उनके लिए रेफरल यूनिट के तौर पर काम कर रहा था और मरीजों को भेज देता था। हालांकि आयुष विभाग पहले से टीबी मरीजों के लिए काम कर रहा था, लेकिन जब कहीं न कहीं रिपोर्टिंग में गैप आया तो यह निर्णय लिया गया कि आयुष विभाग को निक्षय आईडी जनरेट की जाए।
शिमला में हुआ था रिओरिएंटेशन प्रोग्राम
हाल ही में राज्य स्तरीय रिओरिएंटेशन प्रोग्राम भी शिमला में आयोजित किया गया, जिसमें सभी नोडल ऑफिसर्स, जिला आयुर्वेदिक ऑफिसर, सब-डिवीजनल आयुर्वेदिक ऑफिसर ने भाग लिया। इस दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी निक्षय पोर्टल पर इनरोल करने की बात कही गई। इसके साथ ही किस तरह से आयुष चिकित्सकों को निक्षय पोर्टल में इनरोल करना है, इसकी विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सकों व अधिकारियों को पेश आने वाली समस्याओं से निपटने बारे भी जानकारी दी गई। अब यदि कोई टीबी मरीज आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान में जाता है तो डॉक्टर उसे देखेगा और मरीज की पूरी डिटेल, निक्षय पोर्टल में अपलोड कर देगा। आयुष चिकित्सकों की आईडी जनरेट होने से अब टीबी मरीज कहीं भी छूटेगा नहीं, जो गैप पहले रह रहा था वो भी दूर होगा। इससे जो वर्ष 2024 में हिमाचल को टीबी मुक्त बनाने का जो लक्ष्य है, उसे भी पूरा किया जा सकेगा।
