शिमला, संजू-:भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को कांग्रेस सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय साबित करता है कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करते हुए ऐसे प्रावधान लागू किए, जो न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं सके।उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कर्मचारियों की सेवा शर्तों में संशोधन का विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया था, तब भाजपा ने इसका विरोध करते हुए स्पष्ट कहा था कि कॉन्ट्रैक्ट अवधि को वरिष्ठता और वित्तीय लाभों से अलग रखना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। भाजपा ने उस समय भी चेताया था कि ऐसा कानून अदालत में टिकना मुश्किल होगा और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उस आशंका को सही साबित कर दिया है।
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित मामलों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते की किस्तें, वेतन, पेंशन, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और अन्य वित्तीय देनदारियों का समय पर भुगतान नहीं हो रहा है। उनके अनुसार, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों से जुड़ी लगभग ₹2,000 करोड़ की देनदारियां अब भी लंबित हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की संपत्ति संबंधी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि यह रिपोर्ट चुनावी हलफनामों के आधार पर एक स्वतंत्र संस्था ने तैयार की है और इसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय प्रदेश की आर्थिक स्थिति और जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक सहायता, किसानों को बेहतर दूध खरीद मूल्य और युवाओं को रोजगार देने जैसी कई गारंटियां दी थीं, लेकिन अधिकांश वादे अब तक अधूरे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से कर्मचारियों और प्रदेश की जनता से किए गए वादे पूरे करने तथा विफलता की स्थिति में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
