भावना शर्मा: देव भूमि हिमाचल में अनेकों देवी देवता बसते हैं। यहां के लोगों की इन देवी देवताओं में अटूट श्रद्धा और विश्वास हैं। इन दिव्य स्थानों पर जाने मात्र से ही लोगों के कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें मनवांछित फल मिल जाते हैं। ऐसा ही फल निसंतान दंपतियों को खैरा स्थित माता सुन्यारी के मंदिर में मिलता हैं। जहां मंदिर में आने से उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद माता सुन्यारी देती हैं। यह मंदिर जिल्क़ कांगड़ा के पालमपुर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर खैरा नामक स्थान पर स्थित हैं। माता सुन्यारी के इस मंदिर में लोग संतान प्राप्ति का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। असंख्य लोग यहां वर्षभर मां के दरबार पहुंचते हैं और मां की अपार कृपा से संतान प्राप्ति का आर्शीवाद प्राप्त भी करते हैं।
इस मंदिर से जुड़ी यह मान्यता है कि ज्येष्ठ मास में यहां माथा टेकने से निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख का आर्शिवाद प्राप्त होता हैं। मां के दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
यह हैं मंदिर का इतिहास
जनश्रुति के अनुसार माता सुन्यारी सन 1772 में इस स्थान पर अपने पति सुन्यार के साथ चिता में जल कर सती हुईं थी। यह दंपत्ति खैरा के साथ लगते गांव सुन्यार खौला में रहता था, जो आज भी इसी नाम से प्रचलित हैं। बताया जाता है कि वर्ष 1772 में जब उनके पति का देहांत हुआ और उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए इस स्थान पर लाया गया। तो माता सुन्यारी निसंतान थीं और जब वह अपने पति को गोद में लेकर सती होने के लिए चिता पर बैठी तो चिता को अग्नि देने वाला कोई नहीं था।
माता सुन्यारी ने चिता पर बैठकर कहा कि जो पुरूष उनके स्वर्गीय पति की चिता को मुखाग्नि देगा, वह उसे मनवांछित वरदान देंगी। माता की बात सुनकर खैरा के मियां जयमल सिंह कटोच, जोकि स्वयं भी निसंतान थे, उन्होंने मुखाग्नि देना स्वीकार किया। जैसे ही मियां जयमल सिंह कटोच ने चिता को आग दी तो माता सुन्यारी ने उन्हें दो पुत्र और एक पुत्री पैदा होने का वरदान दिया और आग्रह किया कि वह इसी दिन ज्येष्ठ मास के 9 प्रविष्टे अगले वर्ष से इसी स्थान पर छिंज (कुश्ती) मेले का आयोजन अवश्य करें।
माता सुन्यारी के वरदान से अगले वर्ष मियां जयमल सिंह को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ और उन्होंने बड़ी श्रद्धा व खुशी के साथ मां सुन्यारी का पहला छिंज मेला वर्ष 1773 के ज्येष्ठ मास के 9 प्रविष्ठ को आयोजित किया और यह सिलसिला आज भी जारी है। मियां जयमल सिंह को वरदान के अनुसार पुत्र एवं पुत्री और पैदा हुए। बताया जाता है कि वर्तमान में मियां जयमल सिंह कटोच का परिवार सातवीं पीढ़ी में पहुंच चुका है और उनके वंश के लगभग 25 परिवार खैरा और आसपास के स्थानों पर रह रहे हैं।
कटोच भवन में लगे हैं सभी पूर्वजों के छायाचित्र
खैरा गांव में बने कटोच भवन में कटोच वंश के सभी पूर्वजों के छायाचित्र लगे हैं, जोकि लोगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र हैं। बताया जाता है कि जब ज्वाहर चन्द कटोच ने खैरा गांव को आबाद किया था, तो वह अपने साथ लंबा गांव और सुजानपुर टीहरा रियासत से सब जातियों के पेशेवर लोग अपने साथ लाए थे। यही कारण है कि आज खैरा में सभी वर्गों के लोग मिलजुल कर रहते हैं।
हर वर्ष ज्येष्ठ मास में लगता हैं मेला
हर वर्ष ज्येष्ठ मास के 9 से 13 प्रविष्टे तक मां सुन्यारी के मेले का आयोजन बड़ी श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ किया जाता हैं। मेले में लोग माता सुन्यारी का आर्शीवाद प्राप्त करने के साथ ही दंगल, वबॉलीबाल प्रतियोगिताओं का आनंद उठाते है और यहां लगने वाले मेले मे जमकर खरीदारी भी करते हैं।
