Summer express, धर्मशाला, राहुल चावला। कांगड़ा घाटी के भनरेला गांव में प्रकृति, अध्यात्म और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ने के उद्देश्य से वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से आध्यात्मिक ऊर्जा एवं वेलनेस सेंटर विकसित किया जाएगा। मनई के समीप स्थित भनरेला वैली में बनने वाले इस ईको प्रोजेक्ट के पहले चरण पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पूरे प्रोजेक्ट के लिए 200 कनाल भूमि प्रस्तावित है, जबकि पहले चरण के लिए 50 कनाल भूमि अर्जित की जा चुकी है। परियोजना को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी उमेश कुमार सिरोही ने बताया कि इस केंद्र में लोगों को प्रकृति के सानिध्य में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे। यहां प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा पद्धतियों को एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना है। एलोपैथिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए एक बड़े अस्पताल के साथ साझेदारी को लेकर बातचीत चल रही है। इसके अलावा एम्स के सेवानिवृत्त चिकित्सकों के अनुभव और सेवाओं का लाभ भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी है। स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर परियोजना से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से धर्मार्थ संस्थान होगा, जिसका संचालन बिना लाभ-हानि के आधार पर किया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी।
उमेश कुमार सिरोही के अनुसार, परियोजना के भूमि पूजन कार्यक्रम में राज्यपाल कविंदर गुप्ता की उपस्थिति की पुष्टि हो चुकी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को भी कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। उनके 31 अक्टूबर को कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना है। परियोजना को परम पूज्य संत श्री चिदानंद सरस्वती के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से आकार दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस पहल की परिकल्पना ‘एक घर परमार्थ के नाम’ के विचार पर आधारित है। इसका उद्देश्य लोगों को भारतीय वैदिक परंपराओं, आध्यात्मिक संस्कारों और प्रकृति से जोड़ना है। ट्रस्ट की योजना है कि देश-विदेश से आने वाले लोग यहां भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का अनुभव कर सकें।
