संजु चौधरी, शिमला: हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन 10 से 15 दिनों तक शुरू होने वाला हैं जो। इस बार प्रदेश सरकार मंडियों में किलो के भाव से सेब बिक्री करवाने जा रहीं हैं। ऐसे में शिमला की सेब मंडी भट्टाकुफर में सीजन को लेकर अभी भी अव्यवस्था का आलम नजर आ रहा हैं। वर्ष 2019 में लैंडस्लाइड की वजह से क्षतिग्रस्त हुई इस मंडी में हालात अब बदतर होती जा रही हैं। यहां मंडी की छत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है और यहां काम करने वाले लोगों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।
वहीं किलो के हिसाब से सेब की बिक्री के लिए यहां अभी तक वजन करने की कोई भी सुविधा स्थापित नहीं की गई हैं। वजन के लिए सेब को ट्रकों से अनलोड करने के लिए भी उचित स्थान नजर नहीं आता। ऐसी परिस्थितियों में यहां काम कर रहे सेब विक्रेता भी असमंजस में हैं।
शिमला की प्रमुख सेब मंडी भट्टाकुफर में सेब सीजन की तैयारियों की अगर बात की जाए तो यह ना के बराबर हैं। यहां काम कर रहे हैं व्यापारियों के लिए इस बार सेब सीजन मुश्किलें बढ़ाता नजर आ रहा हैं। आढ़तियों का कहना है कि फल मंडी के हालात बेहद खराब है और यह काम करना बहुत मुश्किल हो गया हैं। वही इस बार सरकार ने किलो के भाव से सेब की खरीद-फरोख्त के निर्देश दिए हैं जिसके चलते फल मंडी पर और अधिक भार पड़ने वाला हैं।
व्यापारियों को आशंका है कि सीजन में बिक्री के दौरान जब लगभग हर एक सेब पेटी का वजन करना पड़ेगा तो उसके लिए अभी तक कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं। वहीं सेब के वजन के लिए गाड़ियों से अनलोडिंग करने के लिए भी जगह पर्याप्त नहीं हैं । जिस कारण से बिक्री में खासा समय लगने वाला है और यहां आस-पास के क्षेत्रों में जाम की समस्या खड़ी हो जाएगी । आढ़तीयों का कहना है कि इस बार किलो के भाव से सेब की खरीद-फरोख्त होगी और सेब की क्वालिटी, रंग, साइज और किलो के हिसाब से बोली लगेगी ।
व्यापारियों का मानना है कि सेब मंडियों के खस्ताहाल के चलते अब इस फल मंडी से अलग आढ़तीयो को अपना स्टोर बनाना पड़ रहा है ओर दूसरी मंडियों की ओर पलायन करना पड़ रहा हैं।
