हमीरपुर,29 अगस्त:पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आर्थिक संकट के नाम पर विधायकों के साथ-साथ मुख्य संसदीय सचिवो,मंत्रियों और निगम बोर्ड के अध्यक्षों उपाध्यक्षों को अपनी 2 महीने की सैलरी न लेने की सलाह दे रहे हैं लेकिन उनकी यह सलाह “औरों को नसीहत,खुद मियां फजीहत ” की कहावत को चरितार्थ कर रही है।
राजेंद्र राणा ने यहां जारी एक बयान में कहा कि जिस दिन से सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, उसी दिन से उन्होंने आर्थिक संकट का रोना रोते हुए थोक में कर्ज उठाना शुरू कर दिया और अपने मित्रों में थोक में कैबिनेट रैंक बांटकर खजाना लूटाना भी शुरू कर दिया। सुक्खू से पहले हिमाचल प्रदेश के जितने भी मुख्यमंत्री हुए किसी ने भी दो सलाहकार और दो ओएसडी से ज्यादा अपने साथ नियुक्त नहीं किए थे लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 20 से ज्यादा ओएसडी और दर्जनों सलाहकार तैनात करके सरकारी खजाने पर बोझ डालने में कोई कसर नहीं रखी है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि जब से हिमाचल प्रदेश बना है,तब से प्रदेश में कई सरकारें आई और गई और अभी तक हिमाचल प्रदेश पर 65 हजार करोड रुपए का कर्ज था। लेकिन सुक्खू सरकार ने 17 महीने में ही यह कर्ज एक लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा दिया है। अभी तक सुक्खू सरकार 35000 करोड़ का कर्ज ले चुकी है और नया कर्ज लेने की तैयारी चल रही है।राजेंद्र राणा ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि नीति आयोग की बैठक तक से मुख्यमंत्री ने किनारा कर लिया और हिमाचल का आर्थिक पक्ष नीति आयोग के सामने नहीं रखा। राजेंद्र राणा ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को आए दिन पानी पी पीकर कोसते रहते हैं और दूसरी तरफ नीति आयोग की बैठक से दूरी बना लेते हैं जिससे साफ जाहिर होता है कि उन्हें प्रदेश की कोई चिंता नहीं है।राजेंद्र राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही भयावह आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और सुक्खू सरकार ने प्रदेश को कर्ज के दलदल में डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी है ।
