राकेश,ऊना: प्रदेश में नशा+खोरी इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। युवा पीढ़ी न+शे के इस जाल में फंसती जा रही हैं। वहीं ऊना जिला में नशा+खोरी पर की गई रिसर्च में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिसर्च में यह सामने आया है कि न+शे की चपेट में आने वाले ज्यादातर युवा वह बच्चे हैं जिन्होंने 9 से 15 वर्ष की आयु के बीच में ही पहली बार न+शा चखा था या पहला न+शा किया था। ऐसे में मादक द्रव्यों के प्रति बच्चों को सचेत करने के लिए अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षक वर्ग की भूमिका को समझते हुए अब जिला के स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग का प्रावधान किया जा रहा हैं।
इसी के तहत नशा+मुक्त ऊना अभियान के लिए गठित टास्क फोर्स समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक का आयोजन शनिवार जो डीआरडीए सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त राघव शर्मा ने की। उन्होंने बताया कि ज़िला में नशा+खोरी पर की गई रिसर्च में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि बच्चों पर उनके शुरुआती दौर में ही नजर रखी जाए और उन्हें न+शे से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए।
उन्होंने बताया कि जिला में नशा+मुक्त ऊना अभियान के तहत प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को प्रशिक्षित करने के लिए 287 शिक्षकों को मैंटोर के रूप में चयनित किया गया है, जो नियमित रूप से बच्चों के साथ काउंसलिंग करके उन्हें जागरुक करेंगे। इसके अलावा पीटीएम के दौरान अभिभावकों के साथ भी काउंसलिंग की जाएगी ताकि माता-पिता बच्चों के व्यवहार के प्रति सचेत रहें।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत गत तिमाही में 30 स्कूलों के 2,592 विद्यार्थियों का बेसलाइन सर्वे करके न+शे से संबंधित डाटा एकत्रित किया गया हैं जिसको संकलित कर एक प्रभावशाली कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके अतिरिक्त ज़िला में 10 स्वास्थ्य संस्थान न+शा निवारण के उपचार हेतु चयनित किए गए हैं, जिनमें 15 चिकित्सक व 15 नर्सों को शामिल किया गया हैं।
नशा+मुक्त ऊना अभियान को सामूहिक अभियान बनाने के लिए परिवार से लेकर पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग इत्यादि सभी विभागों को शामिल किया गया हैं। इसके अतिरिक्त आंगवाड़ी कार्यकर्ता व आशावर्कर को भी प्रशिक्षित किया गया है ताकि नशा+खोरी गतिविधियों की वार्ड स्तर पर जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचाई जा सके।
