संजु चौधरी, शिमला: प्रदेश में अडानी समूह की ओर से अपने दो सीमेंट प्लांट बंद कर दिए हैं। इन प्लांट्स के बंद होने से प्रदेश में हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं और ऐसे में प्रदेश के लोग इस फैसले का भी विरोध जता रहे हैं। वहीं सीटू भी बरमाणा एसीसी और दाड़लाघाट अंबुजा सीमेंट प्लांटों को अचानक बंद करने पर भड़क गई है। यही वजह हैं कि सीटू ने इस फैंसले के विरोध में शुक्रवार को डीसी ऑफिस शिमला के बाहर प्रदर्शन किया।
सीटू ने इन प्लांटों को अडानी कंपनी की ओर से तानाशाहीपूर्वक गैर कानूनी तरीके से बंद करने की कड़ी निंदा की और सरकार से इस कंपनी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की हैं। सीटू ने मांग की है कि इन उद्योगों को तुरंत शुरू करवाया जाए।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि अडानी कंपनी हिमाचल प्रदेश में तानाशाही व अराजकता पर उतारू हैं, जिसका ताज़ा उदाहरण एसीसी बरमाणा व अंबुजा दाड़लाघाट सीमेंट प्लांटों को गैरकानूनी तरीके से बंद करना हैं। इस से प्रदेश के लगभग दो लाख लोगों के जीवन पर प्रभाव पड़ना तय है। उन्होंने कहा है कि यह सब केंद्र सरकार की ओर से लागू की जा रही नवउदारवादी नीतियों का परिणाम हैं जिसके कारण अडानी कंपनी खुली लूट व भारी मुनाफाखोरी करने पर अमादा है।
इन कारखानों को अचानक बंद करने से इनमें काम कर रहे हज़ारों कर्मचारियों और मजदूरों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया हैं। अडानी कंपनी के इस गैरकानूनी कदम से सीमेंट ढुलान में लगे हज़ारों ट्रक ऑपरेटरों और उनमें काम करने वाले ड्राइवरों व कर्मचारियों का रोज़गार छिन जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से साफ हो गया है कि केंद्र सरकार ने अपने उद्योगपति मित्रों को यह छूट दे दी है कि वे बिना किसी पूर्व सूचना व नोटिस के ऐसा क़दम उठा सकते हैं।
उन्होंने अडानी समूह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने फैक्टरी एक्ट और आईडी एक्ट जैसे श्रम क़ानूनों की खुली उल्लंघना की हैं, इसलिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए और इन कारखानों को पुनः चालू करने के लिए उचित क़दम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कंपनी की उस दलील को भी हास्यस्पद बताया है जिसमें उसने कहा है कि ये कारखाने घाटे में चल रहे हैं इसलिए इन्हें शट डाउन किया गया हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले जो कारखाने मुनाफ़े में थे वे अचानक कैसे घाटे में चले गए। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से इन कारखानों को जल्दी शुरू करवाने के लिए हस्तक्षेप की मांग की हैं।
