अरविंदर सिंह,हमीरपुर: इस बार प्रदेश में फ़रवरी माह में ही गर्मी का अहसास लोगों को हो रहा हैं।तापमान में एकाएक बढ़ोतरी होने से किसानों को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। हालात ये हैं कि फसलें सूखे की चपेट में आ गई हैं और बर्बाद हो रही हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से हमीरपुर जिला में ही पांच हजार हेक्टेयर उपजाऊ भूमि सूखे की चपेट में आ गई हैं। इस क्षेत्र में उगाई गई फसलों की ग्रोथ नहीं हो पाई हैं। इस वजह से किसानों को यहा तगड़ा घाटा उठाना पड़ रहा हैं। क्लाइमेंट चेंज की वजह से सूखे की चपेट में आने वाली फसल के बीज का आकार बहुत छोटा रह गया हैं। इसका मुख्य कारण समय पर बारिश का न होना ओर अचानक मौसम का बदल जाना माना जा रहा हैं।
जिला में 33 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट कृषि विभाग ने जिला आपदा प्रबंधन कमेटी को भेज दी हैं। बमसन ओर सुजानपुर क्षेत्र में अधिकांश फसल पानी पर निर्भर करती हैं। यहां सिंचाई की सुविधा न होने वाला इलाका सूखे की चपेट में आया है,हालांकि जहां पानी की उपलब्धता है वहां पर फसल अच्छी हैं।
कृषि विभाग की माने तो क्षेत्रों में उगाई गई फसलों को इस बार नुकसान होने की पूरी संभवनाएं बनी हुई हैं। समय पर बारिश न होना ओर सिंचाई की व्यवस्था न होने व क्लाइमेट चेंज की वजह से फसलों के बीज का आकार छोटा रह जाएगा। विभाग ने किसानों को हिदायत दी है कि देशी खादों का इस्तेमाल अपने खेतों में करें। देखा गया है कि जहां देशी खादों का इस्तेमाल किया गया है वहां पर सूखे का असर देखने को नहीं मिल रहा हैं। देशी खादें मिट्टी के उपजाऊपन को बढ़ाती हैं। विभाग अब ऐसी खादें लाने की तैयारी कर रहा है जोकि सूखे से निपटने के लिए काफी कारगर साबित होंगी। ऐसी किस्मों का इस्तेमाल कर किसानों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही हैं। विभाग की मानें तो कई खादें मौसम की मार को झेलते हुए फसलों की पैदावार को बेहतर बनाए रखती हैं। इस किस्म की खाद को लाने की भी कोशिश की जाएगी।
कृषि विभाग के उपनिदेशक अतुल डोगरा ने बताया कि हमीरपुर जिला में चार से पांच हजार हेक्टेयर में सूखे का असर देखने को मिला हैं। इसका मुख्य कारण समय पर बारिश न होना ओर सिंचाई की सुविधा न होना हैं। उन्होंने बताया कि क्लाइमेट चेंज की वजह से भी फसलों की ग्रोथ पर असर पड़ा हैं।उन्होंने बताया कि अब तक 30 फीसदी से अधिक नुकसान फसलों को हो चुका हैं। इसकी रिपोर्ट बनाकर जिला आपदा प्रबंधन कमेटी को भेजी जा चुकी हैं। भविष्य में सूखे के हालातों से निपटने में कारगर खादों को लाया जाएगा, ताकि उनके उपयोग से किसानों को फसलों की अच्छी पैदावार मिल सके। बदले मौसम का फसल पर कोई विपरीत असर न हो।
