Una, Rakesh-:भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने शिमला के रिज मैदान पर कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा मनरेगा को लेकर किए गए धरने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे तथ्यों से परे, राजनीतिक नौटंकी और जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।
125 दिन रोजगार की गारंटी वाली नई योजना को खत्म बताकर जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस
सतपाल सत्ती ने कहा कि कांग्रेस यह झूठा प्रचार कर रही है कि केंद्र सरकार मनरेगा को समाप्त कर रही है, जबकि वास्तविकता इसके ठीक उलट है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार को और मजबूत करते हुए “विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” लागू किया है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 के बजाय 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है। इस योजना के लिए ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार का योगदान ₹95 हजार करोड़ से ज्यादा है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस जानबूझकर उन आंकड़ों को छिपा रही है जो उसकी नाकामी उजागर करते हैं। यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2006–07 से 2013–14 के बीच मनरेगा पर लगभग ₹2.13 लाख करोड़ खर्च हुए, जबकि एनडीए सरकार ने 2024–25 तक ₹8.53 लाख करोड़ से अधिक खर्च कर ग्रामीण रोजगार को नई दिशा दी है।
सत्ती ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस को वास्तव में ग्रामीण मजदूरों की चिंता होती, तो वह धरनों की राजनीति छोड़कर राज्य में मजदूरी भुगतान में देरी, काम की कमी और पंचायतों को अधिकार देने जैसे मुद्दों पर काम करती। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार को निशाना बनाया जा रहा है।
महात्मा गांधी के नाम के राजनीतिक इस्तेमाल पर भी सत्ती ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि जो पार्टी संसद में मर्यादाओं को तार-तार करती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करती है, उसे गांधी जी के आदर्शों की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।सतपाल सत्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य “विकसित भारत के लिए विकसित गांव” है और इसी सोच के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी भवन, ड्रेनेज और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। पंचायतों की ग्रेडिंग के आधार पर फंड आवंटन, मजदूरी में देरी पर अतिरिक्त भुगतान और कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि रिज मैदान पर कांग्रेस का धरना राज्य सरकार की वित्तीय बदहाली, कुप्रबंधन और अधूरे वादों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है, जिसे हिमाचल की जनता अब अच्छी तरह समझ चुकी है।
