राहुल चावला,शाहपुर: कांगड़ा में मौसम पूरी तरह से करवट ले चुका है, यहां एक बार फिर से गर्मियों के सीज़न में बरसात जैसा आभास होने लगा हैं। ओला वृष्टि और तूफ़ान ने लोगों का जीना दूभर कर दिया हैं। ताज़ा मामला शाहपुर के रिडकुमार में सामने आया है, यहां बदहवास तूफ़ान ने लेख राज नाम के रिटायर्ड फ़ौजी के घर की छत को उड़ाकर उन्हें लाचार होने पर मजबूर कर दिया हैं।
जानकारी के मुताबिक लेख राज बीते कल जब शाम के 6 बजे अपनी दुकान पर मौजूद था तो उस वक़्त तेज आंधी चलने लगी, इस बीच लेख राज ने अचानक से ईश्वरीय कृपा के चलते दुकान को न चाहते हुए बंद कर दिया और तुरंत अपनी गौशाला की ओर भागे जहां उनके बच्चे गाय को बांध रहे थे। इससे पहले कि उन्हें कुछ समझ आता अचानक से आई एक आंधी ने उनके घर की छत के कल-पुर्जे खोल दिए और तूफ़ान एकाएक उनके घर की छत को लेकर उड़ गया।
लेख राज ने बताया कि गनीमत यह रही कि उस वक़्त वो गौशाला में मौजूद थे अगर घर या दुकान पर ही रहते तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। जो ईश्वरीय कृपा से टल गई हैं और सिर्फ माल का ही नुकसान हो पाया हैं। पीड़ित लेख राज की मानें तो उनके परिवार में चार सदस्य हैं जिसमें वो और उनकी धर्मपत्नी जबकि दो बेटे हैं जिसमें बड़ा बेटा कॉलेज जाता है जबकि छोटा बेटा 12वीं में पढ़ाई कर रहा हैं और शाम के समय ये तीनों ही घर पर मौजूद थे इनमें से पत्नी और छोटा बेटा घर की चारदीवारी के अंदर थे जबकि बड़ा बेटा गौशाला में और वो ख़ुद दुकान से घर पहुंचे थे और गौशाला से होते हुए घर के अंदर जाना चाह रहे थे कि इसी बीच पलभर में तूफ़ान ने सबकुछ मटियामेट कर दिया।
पीड़ित लेख राज ने बताया कि अगर समय रहते वो सूझबूझ नहीं दिखाते तो जहां छत गिरी है वो वहां मौजूद होते और कोई बड़ी अनहोनी हो जाती। लेख राज ने कहा कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी की समूची जमा पूंजी अपना घर बनाने में लगा दी ताकि बुढ़ापे में सकून से चारदीवारी के अंदर एक छत के नीचे सकून भरे पल व्यतीत कर सकें। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था और आज वो जीवन की जोड़ी हुई पाई पाई को लुटाकर फिर से लाचार हो गए हैं।
अभी बच्चों की पढ़ाई ज्यूं की त्यों है, ऐसे में अब पीड़ित लेख राज ने सरकार, प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके घर की उड़ी हुई छत का मौका मुआइना किया जाए और उचित राशि मुहैया करवाई जाए ताकि दोबारा से छत की मरम्मत करवाने में उन्हें कुछ हद तक राहत मिल सके।
