राहुल चावला, धर्मशाला: कोरोना की वजह से ग्लोबल सिटी मैक्लोडगंज स्थित दलाई लामा टेंपल में दलाईलामा उपदेशों को बंद कर दिया गया था। लंबे अंतराल के बाद अब एक बार फिर से जनता के नाम उनके उपदेशों की कड़ी शुरू गई है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में दलाईलामा की टिचिंग्स कहा जाता है। दलाईलामा के इन उपदेशों की कड़ी के शुरू होते ही देश विदेश में रहने वाले उनके अनुयायियों में खुशी की लहर है और इसके मद्देनजर देश-विदेश से सैकड़ों अनुयायियों का यहां आना भी शुरू हो गया हैं। आज जैसे ही दलाईलामा अपने निवास स्थान शुगलगखांग से टेंपल तक पैदल ही आए तो इस दौरान देश और दुनिया भर से आए लोगों का उन्हें देखने के लिए जमाबड़ा लगा रहा।
दलाईलामा ने भी आए हुए अपने तमाम अनुयायियों को निराश नहीं किया और सबका हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इतना ही नहीं दलाईलामा ने अपने मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल से मंदिर के नीचे सड़क पर खड़े हुए मंदिर को ओर टकटकी लगाए देख रहे अनुयायियों तक का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। उसके बाद प्रिचिंग स्थान पर बैठकर अपने सभी अनुयायियों का उन्हें अभिवादन करते हुए बौद्ध धर्म की शिक्षा पर बात की और दुनिया में शांति पर अपने विचार प्रकट किए।
इस दौरान आइरलैंड से आई शीना ने बताया कि ये उनके लिए सौभाग्य की बात है जो दलाईलामा की प्रिचिंग में उन्हें आने का मौका मिला। ऐसा सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि वो बेहद उत्साहित हैं। दलाईलामा दुनिया भर में एक धार्मिक नेता के तौर पर जाने जाते हैं। वहीं वियतनाम से आई मून ने कहा कि उन्होंने दलाईलामा को वीडियो में ही देखा था और उनके उपदेशों से बहुत प्रभावित हुई। उसके बाद में लंबे समय तक वियतनाम में ही मैडिटेसन करती रही। मगर मैं एक बार दलाईलामा और उनकी टीचिंग्स को सुनने के लिए यहां आना चाहती थी और आज उनका सपना मुकम्मल हो गया है, वो बेहद खुश है।
