नाहन/देवेन्द्र कुमार: सिरमौर जिला की गिरिपार जनजातीय मामले को लेकर जहां जयराम सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस जनजातीय मामले को लेकर सवाल उठा रही है। जनजातीय मामला इसलिए भी सिरमौर जिला में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। 14 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने गिरिपार जनजातीय मामले को हरी झंडी दी है। इसके बाद जहां हिमाचल सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है वहीं गिरिपार के कई इलाकों में जश्न का भी माहौल है। दरअसल कांग्रेस का इस मामले में यह कहना है कि लोगों की मांग के मुताबिक समूचे गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए था, मगर सरकार ने यहां कुछ विशेष जातियों को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिया है। जबकि लोग यहां पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के जौनसार बाबर की तर्ज पर समूचे गिरिपार इलाके को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रहे थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर सिंह ने कहा कि सरकार मामले को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है और यहां पर्दे के पीछे कई राज छुपे हुए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा मीडिया में दिए गए बयान पर साफ कहा गया है कि कुछ जातियों को यहां यह दर्जा दिया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों पूरे क्षेत्र को जनजाति क्षेत्र घोषित नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि गिरिपार इलाके के कौन से लोग इसमें शामिल होंगे और कौन नहीं। अजय बहादुर सिंह ने कहा कि यदि समूचे क्षेत्र को ट्राइबल एरिया घोषित नहीं किया जाता है तो ट्राईबल डेवलपमेंट फंड इस इलाके को नही मिल पाएगा। गिरिपार जनजातीय मामले को लेकर कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का बयान भी सामने आया था कि मामले को लेकर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही इसे जल्द लागू करें ताकि यह चुनावी जुमला साबित ना हो।
