राहुल चावला,धर्मशाला: प्रदेश को ग्रीन स्टेटस बनाने की दिशा में इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की पहल सरकार ने की हैं। इसी के तहत धर्मशाला बस डिपो में भी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही। इन बसों के चलने से एचआरटीसी डिपो धर्मशाला की आय में इजाफा हुआ हैं। इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग हेतू स्थापित चार्जिंग स्टेशन का पहला 42 दिनों का बिल 5 लाख 32 हजार रुपये आया है। ऐसे में अब निगम प्रबंधन इस आंकलन में जुट गया है कि डीजल के मुकाबले इलेक्ट्रिक बस सेवा कितनी किफायती हैं।
बता दें कि मई माह में स्मार्ट सिटी के तहत निगम के धर्मशाला डिपो के बेड़े में शामिल हुई 15 इलेक्ट्रिक बसों को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद इसका संचालन शुरू हो पाया था। इन 15 बसों के माध्यम से धर्मशाला डिपो के 49 रूटों का संचालन किया जा रहा हैं।
निगम से मिली जानकारी के अनुसार धर्मशाला डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के बाद डिपो की आय में 3 फीसदी इज़ाफ़ा दर्ज हुआ हैं। एक इलेक्ट्रिक बस को फुल चार्ज होने में एक घंटा लगता हैं। डिपो के तहत सबसे लंबा रूट धर्मशाला-टांडा-32 मील है, जिसकी लंबाई करीब 170 किलोमीटर हैं। यह इलेक्ट्रिक बसें उतराई में खुद-ब-खुद भी चार्ज होती हैं।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए धर्मशाला बस स्टैंड के पीछे स्थापित चार्जिंग स्टेशन का पहला बिल आने के बाद अब निगम प्रशासन इस जमा-जोड़ में जुट गया है कि यह बसें डीजल के मुकाबले कितनी फायदेमंद हैं। निगम को मिले बिल के आधार पर यह आंकलन किया जा रहा है कि 42 दिन का जो बिल आया है, इस अवधि में इलेक्ट्रिक बसें कितने किलोमीटर चली, बिजली की खपत कितनी हुई, डीजल कितना लगना था, इन सभी विषयों को ध्यान में रखकर अब निगम माथापच्ची में जुटा हैं।
एचआरटीसी डिवीजन धर्मशाला के डीएम पकंज चड्डा ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए स्थापित चार्जिंग स्टेशन का 42 दिन का बिजली बिल 5.32 लाख रुपये आया हैं। इन बसों के संचालन के बाद धर्मशाला डिपो की आय में 3 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई हैं। बिजली बिल के आधार पर यह आंकलन किया जा रहा है कि 42 दिन में इलेक्ट्रिक बसें कितने किलोमीटर चली, कितनी बिजली की खपत हुई और कितना डीजल लगना था? पूरे आंकलन के बाद ही किफायत का पता चल पाएगा।
