जगत सिंह बैंस, नालागढ़: कहने को तो प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ हैं। इस क्षेत्र से करोड़ों का राजस्व प्रदेश सरकार के खाते में जमा होता है लेकिन इसके बावजूद आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस क्षेत्र के पहाड़ी हल्के की दर्जनों पंचायतों के किसानों का सिंचाई सुविधाओं से जुड़ने का सपना अभी भी सपना ही बना हुआ हैं। आलम यह है कि पहाड़ी हल्के की दर्जनों पंचायतों के लोग बारिश पर ही निर्भर हैं। अगर बारिश होती है तो फसलें हो जाती है लेकिन अगर बारिश ना हो तो फसलें सूख जाती हैं।
इन दिनों में भी हालात कुछ इस तरह के बने हुए हैं क्योंकि बारिश ना होने के कारण किसान परेशान चल रहे हैं। बारिश ना होने के चलते जहां गेंहू, सरसों की फसलें नहीं उग रही हैं,वहीं नगदी फसलें भी सूखने की कगार पर आ चुकी है और किसान हर बार की तरह इस बार भी सरकार और प्रशासन से जहां बरसात के दिनों में नदी नालों पर चैक डैम लगाने की मांग कर रहे हैं ताकि उन नदी नालों के स्टोर किए गए पानी को सिंचाई के रूप में यूज कर सकें।
किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि अगर बारिश नहीं हुई तो उनकी फसलें नहीं हो पाएगी और किसानों को अब अपने परिवार के गुजर बसर करने की भी चिंता सताने लगी हैं। किसानों ने सरकार से फसलों के नुकसान के उचित मुआवजे की मांग उठाई हैं।
