मंडी,धर्मवीर(TSN)-तीन पुश्तों से वन भूमि अपना निर्वाह कर रहे लोगों के कब्जों को प्रदेश सरकार नियमित करने जा रही है। जिसके तहत वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 13 दिसंबर 2005 से पहले इस जमीन पर रह रहे लोगों को सरकार द्वारा यहां रहने और अपनी आजीविका कमाने के लिए अधिकार मान्यता पत्र दिया जाएगा। लेकिन इस जमीन को न तो कभी बेचा जा सकेगा और न ही खरीदा जा सकेगा। यह जानकारी मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हिमाचल नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने दी।
मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने दी जानकारी
गुमान सिंह ने बताया कि वन भूमि पर किए गए कब्जे को दावेदार तीन अधिकारों के तहत मान्यता पत्र के लिए आवेदन कर सकता है, जिसमें पट्टे की बराबरी की हिस्सेदारी पति के साथ पत्नी भी होगी। दावेदार द्वारा दावा पेश करने के बाद ग्राम सभा से लेकर जिला स्तर तक बनाई गई विभिन्न समितियों की रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त द्वारा इस जमीन के पट्टे का अधिकार पत्र दिया जाएगा। जिसमें दावेदार को इस जमीन को उपभोग करने का ही अधिकार होगा। दावेदार इस जमीन को कभी भी बेच नहीं सकेगा और आने वाली पीढ़ियों को पुश्त दर पुश्त यह जमीन मिल सकेगी।
गुमान सिंह ने कहा कि सन 1924-25 से तीन पुश्तों से इस जमीन पर अपना निर्वाह कर रहे लोगों को कब्जे की मान्यता मिलना,इन लोगों का कानूनी अधिकार है।इस अधिकार को सरकार उनकी ओर से दी गई रियायत न समझें।पिछले कई सालों से इन नाजायज कब्जों को नियमित करने की कवायद जारी है। 2002 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन कब्जों को नियमित करने की इस कवायत को आगे बढ़ाया गया और उस समय 1 लाख 62 हजार कब्जाधारक पाए गए थे। वहीं ताजा आंकेड़ों के मुताबिक साढ़े तीन लाख के करीब नाजायज कब्जों का रिकॉर्ड सरकार के पास मौजूद है। इस मौके पर उनके साथ देवभूमि पर्यावरण रक्षक मंच के प्रधान नरेंद्र सैनी और महासचिव दिनेश कुमार भी मौजूद रहे।
