संजीव महाजन,नूरपुर: हिमाचल में वैसे तो कई ऐसे दिव्य धार्मिक स्थल है जिसमें श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और श्रद्धा हैं। इसी में से एक है इंदौरा विधानसभा के कस्बा गंगथ में सिद्ध पीठ बाबा क्यालू जी महाराज का दिव्य स्थान। इस स्थान पर स्थित है बाबा क्यालू के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैं। सिद्धपीठ बाबा क्यालू जी महाराज की मान्यता व प्रसिद्धि दूर दूर तक फैली हैं। बाबा जी के प्रति आस्था व विश्वास रखने वाले भक्तजन जहां दरबार में आकर सच्चे मन से जो भी मन्नतें मांगते हैं बाबा जी उनकी समस्त मन्नतों को पूर्ण करते हैं।
यह सिलसिला अभी से नहीं बल्कि सदियों से यहां इस दिव्य स्थल पर चलता आ रहा हैं। यहां पर जो बाबा क्यालू जी का विशाल दंगल होता है उसकी सबसे बड़ी खासियत हैं। सदियों से यहां जगह उतनी ही हैं पर यहां दंगल देखने आने वालों की संख्या हजारों में बढ़ गई है पर बाबा जी का यह चमत्कार , आशिर्वाद है कि उतनी जगह में लाखों लोग दंगल देख जाते हैं और आज तक कोई भी अप्रिय घटना यहां नहीं घटी हैं ।
जन श्रुतियों के अनुसार बाबा क्यालू जी का गंगथ में आगमन तीन शताब्दी पूर्व अखंड भारत के अफगानिस्तान से हुआ था। यहां आकर बाबाजी ने वट वृक्ष के नीचे अपना ध रमाया था। जिस वट वृक्ष के नीचे क्यालू बाबाजी ने धुना रमाया था उसी वट वृक्ष के नीचे उनका भव्य मंदिर स्थित हैं। बाबा क्यालू जी की सत्यता और जन रक्षक होने की काफ़ी कथाएं हैं। बताया जाता हैं कि बाबा क्यालू को दंगल का बहुत शोक था। उनकी प्रसन्नता के लिए इनके प्रांगण में ज्येष्ठ मास की 23 प्रविष्ठे को महा दंगल का आयोजन होता था और यह परंपरा यहां सदियों से चली आ रही हैं जिसे आज भी निभाया जाता हैं। अब यहां होने वाले दंगल को उत्तरी भारत व हिमाचल का प्रमुख दंगल जाना जाता हैं।
बाबा जी सेवक कार्तिक शर्मा ने कहा कि मैं बाबा जी का सेवक हूं। बाबा जी की मूर्ति का स्थापना में पड़दादा ने की केथी। बाबा जी इसी रुप में यहां आए थे। बाद में पिंडी के रुप में यहां समा गए थे। उन्होंने मेरी पड़दादा से कुछ खाने को मांगा था तो उन्होंने दिया और बाबा जी खुश हो गए और यही अपना ध्यान लगाया और यही इसी स्थान में समा गए और तभी से यहां पूजा हो रही हैं। पहले पड़दादू करते थे फिर मेरे दादा , फिर मेरे पिता और अब मैं इस मंदिर में बाबा जी की सेवा कर रहा हूं। मेरे पिता का एक साल पहले देहांत हो गया था।
वहीं स्थानीय निवासी व दंगल कमेटी प्रधान राजेश भल्ला ने बताया कि यह मंदिर हमारी दो तीन पीढ़ियों पहले से हैं। उन्होंने बताया कि कहा जाता हैं कि यह बाबा जी ईरान से राजस्थान, बंगाल से होते यहां आए थे। उसके बाद एक जोत में समा गए जो आज एक पिंडी के रुप में विराजमान हैं। बाबा जी कुश्तियों के बहुत शौकीन थे यही वजह है कि आज भी स्थान पद दंगल की परंपरा को पूरा किया जाता है और यह दंगल आज हिमाचल प्रदेश के साथ साथ उत्तरी भारत का एक महशूर महा दंगल माना जाता हैं। यहां पर हमारे पीढ़ी दर पीढ़ी यहां सेवा कर रहे हैं जो बाबा जी आस्था का प्रमाण यह है।
यहां से पांच किलोमीटर दूर तक से लोग यहां मंदिर आते हैं और मन्नतें मांगते हैं और जब मन्नतें पूरी हो जाती है तो अपने अपने हिसाब से वह यहां आकर बाबा जी दर पीतल का बर्तन चढ़ाते हैं। लोगों की आस्था हैं। आस्था पर दुनिया जी जीती हैं। यहां आकर एक बार मन्नत मांग कर देखें , बाबा जी आशिर्वाद ले और जाने कि बाबा जी की कितनी जय जयकार हैं।
