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Reading: हर साल यहां मां शुलिनी जाती है अपनी बहन दुर्गा से मिलने… जानिए प्रसिद्ध शुलिनी मेले का महत्व
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हर साल यहां मां शुलिनी जाती है अपनी बहन दुर्गा से मिलने… जानिए प्रसिद्ध शुलिनी मेले का महत्व

Chandrika
Chandrika 3 Min Read
Updated 2023/06/19 at 11:23 PM
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चन्द्रिका – हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति यहां न केवल देश बल्कि विदेशों के लोगो को भी अपनी ओर आकर्षित करती है । हिमाचल में सालभर कोई न कोई मेले व उत्सव आयोजित होते रहते है, जो धार्मिक आस्था और यहां की स्मृद्ध लोक संस्कृति के प्रतीक है । हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में हर वर्ष जून महीने में शूलिनी मेले का आयोजन किया जाता है । ये मेला सोलन की अधिष्टात्री देवी माँ शूलिनी को समर्पित है ।

माता शूलिनी देवी के नाम से सोलन शहर का नामकरण

माँ शूलिनी का मन्दिर सोलन शहर में है ।माता शूलिनी बघाट रियासत के शासकों की कूल श्रेष्ठा देवी मानी जाती है। वर्तमान में माता शूलिनी का मंदिर सोलन शहर के दक्षिण में शीली मार्ग के किनारे विद्यमान है। इस मंदिर में माता शूलिनी के अतिरिक्त शिरगुल देवता, माली देवता इत्यादि की प्रतिमाएं मौजूद हैं।प्रदेश में मनाए जाने वाले पारंपारिक एवं प्रसिद्ध मेलों में माता शूलिनी मेला प्रमुख है ।हिमाचल प्रदेश में शुलिनी मेला राज्य स्तरीय मेला है । जलश्रुति के अनुसार माता शूलिनी सात बहनों में से एक थी। अन्य बहनें हिंगलाज देवी, जेठी ज्वला जी लुगासना देवी, नैना देवी और तारा देवी के नाम से विख्यात हैं और माता शूलिनी देवी के नाम से सोलन शहर का नामकरण हुआ। सोलन नगर बघाट रियासत की राजधानी हुआ करता था। इस रियासत की नींव बसंतपाल शासक ने रखी थी।

तीन दिन तक रहती है मां अपनी बहन के साथ

शुलिनी मेले को लेकर कहा जाता है कि आज के दिन वह पूरे गाजे-बाजे के साथ शोभा यात्रा में अपने मंदिर से निकल कर बहन दुर्गा मां को मिलने जाती हैं। इस दौरान शहर वासी ढोल नगाड़ों की थाप पर मां शूलिनी का जयकार लगाकर स्वागत करते हैं। तीन दिन तक अपनी बहन के साथ रहने के बाद वह इसी अंदाज में लौट भी आती हैं । इस मेले के अवसर पर सोलन शहर में जगह जगह भंडारे का आयोजन किया जाता है । वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते है ।

TAGGED: Solan shoolini fair
Chandrika June 19, 2023
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