Shimla, Sanju-प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बिजली महादेव तक बनने जा रहे रोपवे प्रोजेक्ट का पहला चरण अब ज़मीन पर उतर चुका है। 274 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस मेगा परियोजना के पहले चरण में 72 पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू हो गया है। हालांकि यह कार्य कानूनी मंज़ूरी के तहत हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों में इसे लेकर गहरी नाराज़गी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया के ज़रिए कटाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह से हरी-भरी वनस्पति को उजाड़ना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि यह देवभूमि की आस्था और संस्कृति पर भी आघात है।वहीं वन विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कटाई भारत सरकार से फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने के बाद नियमों के तहत की जा रही है। कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट संदीप ने जानकारी दी कि कुल 203 पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई है, जिनमें से पहले चरण में 72 पेड़ों को हटाया जा रहा है। इसमें चील, कायल और देवदार जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं।संदीप, कंजर्वेटर फॉरेस्ट ने सारा कार्य विभागीय निगरानी में हो रहा है। पेड़ों की वित्तीय भरपाई यूज़र एजेंसी पहले ही कर चुकी है और कटाई का कार्य फॉरेस्ट कॉरपोरेशन के माध्यम से किया जा रहा है।”इस बीच देव संस्कृति से जुड़े भगवान रघुनाथ जी के छड़ी बरदार महेश्वर सिंह ने इस कटान पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि हरे-भरे जंगलों की यह कटाई हमारे सांस्कृतिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि यह प्राकृतिक धरोहर को उजाड़ने जैसा है।
अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या विकास की दौड़ में पर्यावरण और संस्कृति की बलि दी जाएगी, या फिर इन दोनों के बीच संतुलन साधने की कोई ठोस नीति सामने आएगी।
