नाहन : देवेंद्र कुमार – पिछले दिनों नाहन डिपो के परिचालक दीपांशु कश्यप ने ईमानदारी का परिचय देते हुए बुजुर्ग महिला का पर्स व चांदी के गहने लौटाए थे। जिसके बाद आरएम एचआरटीसी नाहन द्वारा दीपांशु कश्यप को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम नाहन डिपो द्वारा पहली बार किसी परिचालक को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। इससे पहले भी कई परिचालकों द्वारा यात्रियों के पैसे वापस लौट आए गए हैं।
एचआरटीसी कि इस तरह की शुरुआत करने से परिचालकों को इमानदारी से अपना कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।गौरतलब हो कि इससे पहले परिचालक के पिता भी एचआरटीसी में पद और परिचालक सेवा दे चुके हैं। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान सूझबूझ का परिचय देते हुए लुटेरों से यात्रियों के साथ-साथ बस को सुरक्षित रूप से निकाला था।
परिचालक के पिता ने भी एचआरटीसी में सेवा के दौरान बचाई थी यात्रियों की जान
दरअसल, हिमाचल पथ परिवहन निगम के नाहन में कार्यरत चालक पवन कुमार व परिचालक कशमीर चन्द 12 दिसम्बर 2002 को बैजनाथ-देहरादून रात्री बस लेकर आ रहे थे। इसी दौरान रायपुर रानी के समीप प्यारेवाला गांव में लूटेरों ने सड़क पर लट्ठे रखकर मार्ग को अवरूद्ध कर दिया। इतना ही नहीं इस दौरान लुटेरों ने पवन कुमार से बस की चाबी भी छीन ली। वहीं चालक ने भी सूझबूझ का परिचय देते हुए कैश से भरे बैग को छुपा दिया व गाड़ी को अंदर से लॉक कर दिया। जिसके बाद परिचालक ने चालक से बस को चलाने के लिए कहा। चालक ने भी निडर होकर लोहे की छड़ से बस स्टार्ट कर लुटेरों द्वारा लगाए गए लट्ठों के ऊपर से बस को सुरक्षित निकाल लिया। ऐसे में दोनों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए लुटेरों से ना केवल सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा की थी बल्कि यात्रियों की जान भी बचाई। इसके लिए चालक व परिचालक को तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर ने प्रशस्ति पत्र देकर 15 अप्रैल 2003 को सम्मानित किया था।
