Chintpurni, Vikas-माता श्री चिंतपूर्णी महोत्सव में हुई अव्यवस्थाओं को लेकर राजनीति गरमा गई है। पूर्व विधायक और भाजपा नेता बलबीर सिंह चौधरी ने चिंतपूर्णी में पत्रकार वार्ता कर जिला प्रशासन और कांग्रेस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महोत्सव के दौरान पुलिस द्वारा किए गए सभी इंतजाम विफल साबित हुए, जबकि समापन के बाद कांग्रेस के प्रतिनिधि इसे “बेहतर आयोजन” बताकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
बलबीर चौधरी ने कहा कि विरोध को बिना समझे खारिज करना गलत है। महोत्सव की वास्तविकताओं को देखने और आत्मचिंतन करने की जरूरत है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सवाल किया कि पिछली बार महोत्सव के दौरान उपमुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की थी कि मंदिर से एक भी रुपये का खर्च नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद मंदिर न्यास से 50 लाख रुपये महोत्सव के नाम पर खर्च कर दिए गए। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि इस बार महोत्सव में हिमाचली संस्कृति से अधिक पंजाबी कल्चर को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन विभिन्न आयोजनों—ऊना उत्सव, हरोली उत्सव, शिवबाड़ी उत्सव, पीपलू मेला—के नाम पर केवल अपनी चमक बढ़ाने का काम कर रहा है, जबकि संस्कृति के संरक्षण की वास्तविक परिभाषा कहीं खो गई है।
चौधरी ने मंदिर से संबंधित महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि माता की पावन पिंडी के स्वरूप को महोत्सव के मंच पर स्थापित करने का अधिकार किसने दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के पास मंदिर विभाग होने के बावजूद आज तक चिंतपूर्णी मंदिर में संध्या भजन शुरू नहीं करवाए जा सके।उन्होंने मंच पर प्रस्तुत किए गए गीत—“निंद्रा निआउंदी या तेरे बाजों”—का उल्लेख करते हुए कहा कि मां के पवित्र नाम पर ऐसे गीत गायन का क्या अर्थ है और इससे भक्तों को क्या संदेश देना चाहा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें महोत्सव के आयोजन से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन माता चिंतपूर्णी के नाम पर पंजाबी गीतों के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं।पत्रकार वार्ता के दौरान चिंतपूर्णी बूथ कमेटी के प्रधान निरंजन कालिया, राज कुमार, सतीश कालिया, संजीव रत्न और वेदप्रकाश भी उपस्थित रहे।
