संजु चौधरी, शिमला: प्रदेश सरकार की ओर से अपनी पहली कैबिनेट बैठक में प्रदेश के कर्मचारियों को ओपीएस बहाली का तोहफ़ा दिया हैं। कर्मचारियों की मांगे पूरी होने के बाद अब प्रदेश के किसान बागवानों ने भी सरकार को अपने वायदे याद दिलवाएं हैं। संयुक्त किसान मंच के सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बुधवार को शिमला में बैठक की और सरकार को लंबे समय से चली आ रही बागवानों की मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की हैं। बागवानों ने एपीएमसी एक्ट को लागू करने, बागवानी बोर्ड के गठन, फलों के दामों को तय करने के लिए जल्द कमेटी बनाने की कांग्रेस सरकार से मांग की हैं।
बागवानों का कहना है कि प्रदेश में 2005 में एपीएमसी एक्ट बना हुआ हैं, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया हैं। कांग्रेस सरकार को इसे शीघ्र लागू करना चाहिए। इसके लागू होने से सेब किलो के हिसाब से बिकेगा और महंगे कार्टन की समस्या का समाधान अपने आप हो जाएगा। बागवानी बोर्ड का गठन कर उसमें किसान बागवानों के प्रतिनिधियों को ज्यादा शामिल किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले गारंटी दी थी कि किसान बागवान अपने फलों के रेट स्वयं निर्धारित करेंगे।
रेट निर्धारण कमेटी में बागवानों को शामिल किया जाना चाहिए। बागवानों को दिए जाने वाले खाद, कीटनाशकों की गुणवता को भी समय-समय पर चैक किया जाना चाहिए। एपीएमसी और हिमफैड से मिलने वाली कीटनाशक व खाद का मूल्य बाजार से ज्यादा होता हैं। सरकार को इसमें लगाम लगाने की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि हॉर्टिकल्चर को टूरिज्म के साथ जोड़ने की जरूरत हैं। इसकी शुरुआत होनी चाहिए जिससे प्रदेश की आर्थिकी भी मजबूत होगी।
