अरविंदर सिंह,हमीरपुर: आज के समय में जहां लोग खेती-बाड़ी और पशुपालन को छोड़कर नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं। तो वहीं समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पारंपरिक कृषि, बागवानी, पशुपालन के साथ ही कृषि क्षेत्रज़ पशुपालन क्षेत्र से जुड़े कार्य कर लाखों रुपए की आमदनी कमा रहे हैं। ऐसा ही कुछ उदाहरण आज की युवा पीढ़ी के लिए बन रहे हैं हमीरपुर ज़िला के नादौन उपमंडल के गांव ग्वालपत्थर के 85 वर्षीय गोपाल चंद कपूर, उनके पुत्र राजेंद्र कुमार, बहू जयवंती और पौत्र शिव कुमार। यह सभी लोग मधुमक्खी पालन कर लाखों रुपए की आमदनी अर्जित कर रहें हैं।
इन्होंने मधु-मक्खी पालन को एक व्यवसाय के रूप में अपनाकर न केवल घर में ही अच्छी आय अर्जित करने का साधन जुटा लिया हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी स्वरोजगार की राह अपनाने के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित कर रहे हैं।
मधु-मक्खी पालन के लिए समर्पित गोपाल चंद कपूर आज के दौर में स्वरोजगार की संभावनाएं तलाश रहे ग्रामीण युवाओं के लिए एक बड़े प्रेरणास्रोत हो सकते हैं। लगभग तीन दशक पूर्व वर्ष 1992 में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से अनुदान एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महज 4-5 बक्सों के साथ मधु-मक्खी पालन शुरू करने वाले गोपाल चंद कपूर और उनका परिवार अब हर साल लाखों रुपये का शहद बड़ी-बड़ी कंपनियों को बेच रहे हैं। गोपाल चंद कपूर और उनके बेटे राजेंद्र कुमार शिवा ग्रामोद्योग समिति के नाम से मधु-मक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र चलाकर अन्य लोगों को भी प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं ओर उन्हें इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
गोपाल चंद और राजेंद्र कुमार का कहना है कि शहद एक ऐसा उत्पाद है, जिसकी बाजार में हर समय काफी मांग रहती है और इसे दाम भी काफी अच्छे मिलते हैं। यह कभी खराब भी नहीं होता है और इसकी स्टोरेज एवं परिवहन के लिए कोई विशेष व्यवस्था भी नहीं करनी पड़ती हैं। किसानों-बागवानों के लिए यह एक बहुत ही अच्छा विकल्प है और इसमें फायदा ही फायदा हैं ।
विभाग दे रहा 80 फीसदी अनुदान
बता दें कि हिमाचल प्रदेश सरकार भी मधु मक्खी पालन को बढ़ावा दे रही हैं। प्रदेश सरकार ने उद्यान विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री मधु विकास योजना के तहत 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान भी किया हैं। ऐसे में जो भी व्यक्ति मधुमक्खी पालन करना चाहता है उसे आर्थिक सहायता भी सरकार की ओर से मुहैया करवाई जा रही है जिससे कि स्वरोजगार को अपनाकर ही युवा और अन्य लोग अपने लिए रोजगार जुटा सकें।
