शिमला (भावना शर्मा): प्रदेश में विधानसभा चुनावों के समय में आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। ऐसे में आम आदमी पार्टी लंबे समय से हिमाचल में बड़े चेहरे की तलाश कर रही थी। बड़ा चेहरा न होने के चलते प्रदेश में पार्टी अपना जनाधार नहीं बना पाई थी,लेकिन अब पार्टी की यह तलाश पूरी हुई है और पूर्व सांसद राजन सुशांत को आप ने पार्टी में शामिल कर लिया है। राजन सुशांत के आप पार्टी को जॉइन करने के बाद माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी राजन सुशांत को विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में चुनावी मैदान में उतार सकती है।
राजन सुशांत चार बार विधायक एक बार मंत्री और एक बार सांसद रह चुके है और ओल्ड पेंशन बहाली ओर पौंग बांध विस्थापितों के लिए लड़ाई रहे है और इसके लिए वह अनशन पर बैठे थे। राजन सुशांत ने कर्मचारियों के लिए सांसद पेंशन न लेने का भी एलान किया है। कर्मचारियों को साधने ओर प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में पार्टी को मजबूत करने को लेकर राजन सुशांत की पार्टी में वापसी काफी अहम मानी जा रही है। बता दें कि इससे पहले भी राजन सुशांत 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और उन्हें 2016 में संयोजक बनाया गया था, लेकिन उन्होंने 2016 में आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद वह किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े।
2020 में राजन सुशांत ने पौंग बांध विस्थापितों का साथ लेकर हमारी पार्टी हिमाचल पार्टी बनाई। 2021 में फतेहपुर उपचुनाव अपनी पार्टी से लड़ा। इसके बाद अपनी पार्टी भी छोड़ दी। अब एक बार फिर से 2022 के चुनावों के समय में उन्होंने आप का दामन थाम लिया है। वहीं अगर बात आम आदमी पार्टी कि की जाए तो हिमाचल में आम आदमी पार्टी 68 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान प्रदेश में रैलियां कर जनता को काम करने की गारंटी दे रहे है।
आप प्रदेश में चुनावी मैदान में तो उतर चुकी है लेकिन प्रदेश में पार्टी में ऐसा कोई बड़ा चेहरा नहीं है जोकि पार्टी को मजबूत करवाने का काम कर सके, हालांकि पार्टी ने कांग्रेस-भाजपा के बड़े चेहरों को आप में शामिल करने के दावे भी किए गए थे लेकिन कोई बड़ा चेहरा पार्टी में अभी तक शामिल नहीं हो पाया है। ऐसे में अब पार्टी ने अपने पुराने संयोजक राजन सुशांत को भी पार्टी में शमिल किया है ओर अटकलें यह भी लगाई जा रही है कि राजन सुशांत को ही मुख्यमंत्री का चेहरा बना कर आप प्रदेश में चुनावी दाव खेलेगी।
बार बार पार्टियां बदलने का भी राजन सुशांत का रहा है रिकॉर्ड
चार बार विधायक, एक बार मंत्री व एक बार सांसद रहे सुंशात अब तक चार बार पार्टियां बदल चुके हैं। सुशांत पहली बार 1982 से 1985 तक भाजपा के विधायक रहे। इसके बाद 1985-1990, 1998-2003 व 2007-2009 तक भाजपा के विधायक रहे। 1998-2003 में भाजपा सरकार के कार्यकाल में वह राजस्व मंत्री रहे। 2009 में वह सांसद बने। पार्टी के खिलाफ कार्य करने पर उन्हें निलंबित कर दिया था। 2014 में वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। दो साल तक कार्य करने के बाद 31 जनवरी 2016 को उन्होंने आप से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद अपनी पार्टी प्रदेश में बनाई लेकिन फिर उसे भी छोड़ दिया और अब दोबारा वापसी आप में की है।
हिमाचल में चेहरों पर होती है राजनीति
हिमाचल में कांग्रेस, भाजपा में चेहरों पर ही अब तक राजनीति होती आई है। कांग्रेस जहां दशकों तक वीरभद्र सिंह के ही इर्दगिर्द घूमती रही और वीरभद्र के नाम पर ही वोट बटोरती रही है और इन चुनावों में कांग्रेस बिना वीरभद्र के उत्तर रही है। वहीं भाजपा में जहां पहले शांता कुमार रहे और उसके बाद प्रेम कुमार धूमल बड़ा चेहरा रहे हैं। 2017 कि चुनावों में भी भाजपा ने प्रेम कुमार धूमल को ही मुख्यमंत्री घोषित किया था लेकिन पार्टी सत्ता पर काबिज तो हुई लेकिन धूमल चुनाव हार गए।
