Shimla, 21 January-:हिमाचल प्रदेश बेरोजगार कलाध्यापक (ड्राइंग मास्टर) संगठन ने वर्तमान राज्य सरकार के प्रति गहरी नाराज़गी जताई है। संगठन का कहना है कि बीते तीन वर्षों से वे लगातार माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक सहित मंत्रियों और विधायकों से अपनी मांगों को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
संगठन के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं यह घोषणा की गई थी कि सरकारी मिडिल स्कूलों में कला विषय के लिए लागू 100 विद्यार्थियों की शर्त को समाप्त कर दिया गया है, लेकिन आज तक इसका कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। जब संगठन मुख्यमंत्री से मिलता है तो अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं, जबकि अधिकारी इस विषय को दोबारा मुख्यमंत्री के पाले में डाल देते हैं।संगठन के सचिव विजय चौहान और कोषाध्यक्ष शक्ति प्रसाद ने बताया कि हाल ही में शिमला में शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव से हुई बैठक में आश्वासन दिया गया था कि यह मामला कैबिनेट में ले जाया जाएगा, लेकिन इसके विपरीत सरकार ने सीबीएसई स्कूलों को मर्ज कर फाइन आर्ट की पोस्टों को मंजूरी दे दी, जिससे ड्राइंग मास्टरों के पदों पर संकट खड़ा हो गया है।
संगठन ने मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों ने दो वर्षीय ड्राइंग मास्टर डिप्लोमा किया है, उन्हें भी सीबीएसई स्कूलों में फाइन आर्ट के साथ पढ़ाने का अवसर दिया जाए।उपाध्यक्ष जगदीश ठाकुर ने कहा कि कला विषय को पहली कक्षा से अनिवार्य किया जाना चाहिए, जैसा कि केंद्र सरकार के विद्यालयों में लागू है। उन्होंने यह भी कहा कि कलाध्यापक प्राइमरी स्तर पर अन्य विषय पढ़ाने में भी सक्षम हैं।संगठन का कहना है कि कला न केवल छात्रों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करती है, बल्कि उनके मानसिक विकास और भविष्य के करियर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, संगीत, साहित्य और नृत्य जैसे क्षेत्र बच्चों को इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने में सहायक होते हैं।
संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 18 हजार बेरोजगार कलाध्यापक हैं, जो पहले भी सरकार का समर्थन कर चुके हैं। यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो वे इस विषय को लिखित रूप से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी तक पहुंचाएंगे तथा चुनावों के दौरान किए गए वादों की याद दिलाएंगे।
