राहुल चावला, धर्मशाला: प्रदेश में ग्राउंड वॉटर कितना बढ़ा और कितना कम हुआ, इसकी निरंतर मॉनिटरिंग की जाती हैं। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) धर्मशाला की ओर से साल में चार ग्राउंड वॉटर लेवल मॉनिटरिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता हैं। मॉनिटरिंग के लिए सीजीडब्ल्यूबी ट्यूबवेल, कुओं के साथ पीजोमीटर का सहारा लेता हैं। यही वजह है कि अब सीजीडब्ल्यूबी प्रदेश भर में वॉटर लेवल मापने के लिए 400 से अधिक ट्यूबवेल लगा चुका हैं। सीजीडब्ल्यूबी ग्राउंड वॉटर का लेवल जानने के लिए कि कहां कितना पानी है, ट्यूबवेल लगाता है, जहां पानी मिलता है, उसका पंपिंग टेस्ट किया जाता हैं।
ट्यूबवेल के माध्यम से ग्राउंड वॉटर की जानकारी हासिल करने के बाद ट्यूबवेल आम पब्लिक के यूज के लिए जल शक्ति विभाग को सौंप दिया जाता हैं। अभी तक सीजीडब्ल्यूबी की ओर से 400 के करीब ट्यूबवेल बनाकर जल शक्ति विभाग को दे चुका हैं।
डायरेक्टर, सेंट्रल ग्राउंड बोर्ड धर्मशाला जेएन भगत ने बताया कि ग्राउंड वॉटर कितना बढ़ा और कितना कम हुआ, इसकी हर साल चार बार मॉनिटरिंग की जाती हैं। मॉनिटरिंग के लिए सीजीडब्ल्यूबी टयूबवेल, कुओं के साथ पीजोमीटर का प्रयोग किया जाता हैं। मई की मॉनिटरिंग के दौरान वॉटर सेंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं, ताकि पता चल सके कि पानी में कोई समस्या तो नहीं हैं। वर्ष भर की मॉनिटरिंग उपरांत ग्राउंड वॉटर रिसोर्स इस्टीमेशन रिपोर्ट तैयार की जाती हैं।
प्रदेश में 169 कुएं चिंहित
वॉटर लेवल मॉनिटरिंग के लिए बोर्ड ने प्रदेश भर में 169 कुएं चिंहित किए हैं। साथ ही पीजोमीटर के माध्यम से भी जलस्तर को मापा जाता हैं। कुओं व पीजोमीटर की मॉनिटरिंग एक वर्ष में चार बार जनवरी, मई, अगस्त और नवंबर माह में की जाती हैं।
मई की मॉनिटरिंग में लिए जाते हैं। वॉटर सेंपल
मई के वॉटर लेवल की मॉनिटरिंग के साथ वॉटर क्वालिटी के लिए सेंपल भी लिए जाते हैं, जिससे पानी की क्वॉलिटी को परखा जाता हैं।
चंडीगढ़ भेजे जाते हैं सेंपल
सेंपलों को जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित लैब में भेजा जाता है, जिसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि जिस क्षेत्र के पानी में किसी तरह की कोई समस्या तो नहीं हैं। वर्ष में चार बार ग्राउंड वाटर की मॉनिटरिंग करके एक रिपोर्ट तैयार की जाती है, इस ग्राउंड वॉटर रिसोर्स इस्टीमेशन रिपोर्ट को हर वर्ष तैयार किया जाता हैं।
पीजोमीटर भू-तकनीकी सेंसर
पीजोमीटर भू-तकनीकी सेंसर हैं जिनका उपयोग जमीन में छिद्र जल दबाव (पीजोमेट्रिक स्तर) को मापने के लिए किया जाता हैं। यह मिट्टी, मिट्टी/चट्टान भराव, नींव और कंकरीट संरचनाओं में छिद्र जल दबाव को मापने के लिए डिजाइन किया गया हैं।
