Shimla, 18 November-:हिमाचल परिवहन तकनीकी कर्मचारी संगठन की त्रैमासिक बैठक आज 18 नवंबर 2025 को परिवहन निगम मुख्य कार्यशाला तारादेवी में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष पूर्ण शर्मा ने की। इस अवसर पर राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों सहित प्रदेश के विभिन्न डीपूं से आए लगभग सौ से अधिक तकनीकी कर्मचारियों ने भाग लिया।
बैठक में अध्यक्ष पूर्ण शर्मा और राज्य प्रधान खेम चंद ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए निगम में तकनीकी कर्मचारियों और कर्मशालाओं से जुड़ी अनेक समस्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कर्मशालाओं की बदहाल स्थिति, स्टाफ की भारी कमी और पीस-मील कर्मचारियों को बार-बार आश्वासन देने के बावजूद अनुबंध पर न लिया जाना प्रबंधन की उदासीनता को दर्शाता है। इसके साथ ही तकनीकी कर्मचारियों को टेक्निकल स्केल का लाभ न मिलना और कर्मशालाओं में स्वास्थ्य व सुरक्षा के बुनियादी प्रावधानों का अभाव बड़ी समस्या बन चुका है। आधुनिक टूल्स व मशीनरी के अभाव ने कार्य को और कठिन बना दिया है।
संगठन के महासचिव एच.के. शर्मा ने बताया कि वर्ष 1996 के बाद तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती बहुत ही सीमित हुई है। 2012 की छुटपुट भर्ती के बावजूद अधिकांश स्टाफ सेवानिवृत्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि 1996 में जहां निगम के बेड़े में 1700 बसें थीं और तकनीकी कर्मचारियों की संख्या 2200, आज बसों की संख्या बढ़कर 3200 हो गई है जबकि तकनीकी स्टाफ केवल 1100 के आसपास रह गया है। नए डिपू तो खोले गए, लेकिन उन्हें चलाने के लिए आवश्यक स्टाफ स्वीकृत नहीं किया गया, जिससे कार्य का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है।
कर्मशालाओं की जर्जर स्थिति को लेकर भी गंभीर मुद्दे उठाए गए। कर्मचारियों ने बताया कि धूल, धूप, मिट्टी, वर्षा, गर्मी और सर्दी से बचाव की उचित व्यवस्था नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण तथा सुरक्षा मानकों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।तकनीकी संगठन ने परिवहन मंत्री और निगम प्रबंधन से मांग की है कि समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर कर्मशालाओं में सुधार किया जाए, तकनीकी स्टाफ की भर्ती हो, पीसमील कर्मचारियों को अनुबंध में लिया जाए, स्टोर में गुणवत्तापूर्ण कलपुर्जे उपलब्ध कराए जाएं और भर्ती व पदोन्नति नियमों में संशोधन किया जाए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम न उठाए गए, तो वे वर्क टू रूल और वर्क टू डेज़िगनेशन जैसी कार्रवाई करने को बाध्य होंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर श्रम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
