अनिल कुमार: हिमाचल को देव भूमि के नाम से जाना जाता हैं। यहां देवी देवताओं से जुड़ी अनेकों मान्यताएं ओर परंपराएं हैं। सदियों से चली आ रही इन मान्यताओं और परंपराओं का आज भी निर्वहन हो रहा हैं।वहीं यह देवी देवता भी यहां के लोगों की रक्षा ओर सुख समृद्धि की पूरी जिम्मेवारी उठाए हुए हैं। इसी तरह की परंपरा जनजातीय जिला किन्नौर में नवरात्रों से जुड़ी हुई हैं। यहां जिला किन्नौर के कल्पा में नवरात्रों में यहां के स्थानीय देवी देवता ग्रामीणों की सुख समृद्धि के लिए तपस्या पर बैठते हैं।
सोमवार को नवरात्रे के छठे दिन पर कल्पा में स्थानीय देवता ब्रह्मा विष्णु, नारेनस व नागिन माता ने मंदिर प्रांगण मे निकलर सभी ग्रामीणों को आशीर्वाद प्रदान किया हैं। किन्नौर ज़िला में नवरात्रो को निरात्र कहा जाता है और इस अवसर पर स्थानीय देवी देवता मंदिर के बाहर निकलर ग्रामीणों के सुख दुख ओर समस्याओं को सुनते हैं,जिसके बाद करीब तीन दिन तक हवन कर मंदिर प्रांगण मे तीन दिन तक तपस्या में बैठते हैं। इस दौरान मंदिर की कोई अन्य गतिविधि या कार्यवाही नहीं होती हैं।
मान्यताओं के अनुसार कल्पा के स्थानीय देवता ब्रह्मा विष्णु, नारेनस व नागिन माता इस तपस्या को तीन दिन तक ग्रामीणों के सुख शांति व गांव में वर्षभर अच्छी फ़सल हो इसलिए करते हैं। इसके बाद दोबारा देवता मंदिर में तपस्या से उठकर ग्रामीणों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। नवरात्रों के अवसर पर कल्पा के सभी स्थानीय देवता के समक्ष ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा पहनकर लोक नृत्य करते है और स्थानीय देवी देवताओं से सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
नवरात्रों के दौरान इन बातों पर रहता हैं प्रतिबंध
नवरात्रों के अवसर पर कल्पा स्थित ब्रह्मा विष्णु नारेनस व नागिन माता के मंदिर प्रांगण में तामसिक भोजन कर प्रवेश करने पर भी प्रतिबंध होता हैं। मंदिर के अंदर टोपी, ऊन से बने कोट आदि पहनना अनिवार्य होता हैं। यदि इन नियमों की कोई उलंगना करता है तो ऐसी परिस्थिति में मंदिर कमेटी की ओर से जुर्माना भी लगाया जा सकता हैं।
