विकास शर्मा,चिंतपूर्णी : शारदीय नवरात्रों के उपलक्ष्य पर विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी के दरबार ने दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। नवरात्रों दूसरे दिन मंगलवार को भी चिंतपूर्णी मंदिर के कपाट सुबह 4:00 बजे खुलने से पहले ही मंदिर में माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालु पहुंच चुके थे। मंदिर के कपाट खुलते ही मां चिंतपूर्णी का दरबार जयकारों और घंटियों की आवाज से गूंज उठा। वहीं मंदिर प्रबंधन की ओर से भी सभी तरह के इंतजाम श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर किए गए है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर खाने-पीने की व्यवस्था भी मंदिर में की गई है।
मंदिर में माता रानी के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिंतपूर्णी क्षेत्र में पंजाब अन्य राज्यों की लंगर संस्थाओं ने अपने लंगर लगाए है। इन लंगरों में श्रद्धालुओं को देसी घी के अलग-अलग तरह के व्यंजन परोसे जा रहे है। लंगर संस्थाओं की ओर से दाल रोटी,जलेबी,समोसे व कुछ लंगर संस्थाओं नेे व्रत का खाना भी श्रद्धालुओं को बांटा जा रहा है। वहीं विभिन्न-विभिन्न राज्यों के श्रद्धालु भी इन लंगर संस्थाओं की ओर से परोसे जा रहे लगरों का प्रसाद ग्रहण कर रहे है।
वही मंदिर न्यास से मिली जानकारी के अनुसार सात लंगर संस्थाओं ने चिंतपूर्णी क्षेत्र में लंगर लगाने की अनुमति ली है। इसके लिए बकायदा इन लंगर संस्थाओं ने 10 हजार धरोहर राशि और 10 हजार लंगर फीस जमा करवाई गई है। इन लंगर संस्थाओं को साफ सफाई और हाइजीनिक तरीके से खाना परोसने के लिए सख्त आदेश दिए गए है। इसके अलावा मंदिर न्यास की ओर से लगातार इनकी चेकिंग की जा रही है।
वहीं मंदिर अधिकारी बलवंत सिंह ने बताया कि दूसरे नवरात्रि तक अभी तक 7 लंगर संस्थाओं ने मंदिर कार्यालय से लंगर लगाने की अनुमति दी है। इन लंगर संस्थाओं को सड़क पर लंगर बांटने और सिंगल या यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करने की सख्त हिदायत दी गई है। अगर कोई भी लंगर संस्था नियमों का उल्लंघन करती हुई पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं लंगर का प्रसाद ग्रहण कर रहे मोहन और श्याम मुरारी ने बताया की पिछले दो-तीन सालों से कोरोना होने के कारण लंगर लगाने की अनुमति ना होने के वजह से श्रद्धालुओं को बाहर खाना खाना पड़ता था लेकिन इस बार लंगर संस्थाओं की ओर से लंगर लगाए गए हैं जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है।
