बिलासपुर/सुभाष ठाकुर –
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता संदीप सांख्यान ने एक बार फिर भाजपा के आडंबरों की पोल खोलते हुए कहा है कि भाजपा नेता चुनावी समय देखकर कर इतने उतावले हो गए हैं कि मुद्दों को कैश करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है लेकिन प्रकृति के आगे सब बेबस है। बीते दिनों गोंविद सागर झील के मंदिरों के पुर्नस्थापन को लेकर छेड़ी गई कवायद के तहत हैंडपंप वाली मशीन सांढु के मैदान में खड़ी कर मिट्टी और पानी के सैंपल लेने की बात कही जा रही है। हैरानी का विषय है कि अगस्त में पानी चढ़ने की रफ्तार तीव्र है और इसी सप्ताह पानी चढ़ जाएगा,ऐसे में कहीं मुद्दा भी पानी में न चला जाए तो दिखाने के लिए यह एक्सरसाईज का करवाना सभी के समझ में आ रहा है।
संदीप सांख्यान ने कहा कि चुनावों के नजदीक आते ही भाजपा मिथ्या लोकप्रियता के आडबंर में अनर्गल काम करने में जुट गई है, इनकी राजनीतिक जमीन पूरी तरह से खिसक चुकी है और बची साख को बचाने के चक्कर में लोगों के सामने दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोविंद सागर झील के जलमग्न मंदिरों को उपर उठाने के लिए घोषित इस 15 सौ करोड़ के प्रोजेक्ट को अगस्त महीने में शुरू करवाने के पीछे की मंशा साफ दिख रही है। कुछ दिनों में यह मंदिर एक बार फिर जलसमाधि लें लेंगे ऐसे में यह कार्य महज नौटंकी के अलावा और कुछ नहीं है। हर वर्ष कम से कम छह महीने तक यह मंदिर पानी में रहते हैं जबकि दो महीने भारी भरकम सिल्ट होने के कारण इनके करीब जाना भी मुश्किल होता है।
लेकिन एल एंड टी कंपनी को तुरंत बिलासपुर भेज कर जताया जा रहा है कि उन्होंने अपना वायदा पूरा कर दिया है। कंपनी के नुमाइंदे और मशीनरी यहां आना शुरू हो गई है लेकिन यह सब बिना मतलब का ड्रामा और खर्चा है। उन्होंने कहा कि यह तो यहां के प्रत्येक बाशिंदे को पता है कि जुलाई अगस्त में गोविंद सागर जलाश्य में जल भराव शुरू हो जाता है ऐसे में भाजपा द्वारा यह एक ऐसीऔपचारिकता है जो केवल आंखों का भ्रम है। अगर 15 सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाना था तो मार्च- अप्रैल में क्यों काम नहीं शुरू करवाया गया।
उन्होंने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से विकास करने वाले भाजपाई लुहणु से बंदला रोप-वे पर कुछ काम करते तो जनता को विश्वास होता, कृत्रिम झील को बनाने का प्रयास करते तब भी कुछ भला होता लेकिन लोकप्रियता पाने के लिए कुछ भी करने वाले भाजपा नेता और इनकी सरकार के जाने का समय नजदीक है। बेहतर होता कि देश के लिए अपना सर्वस्व होम करने वाले भाखड़ा विस्थापितों की सरकार सुध लेती और उन्हें एकमुश्त राहत देकर दशकों की समस्या का समाधान करती लेकिन लिप्सा भरी राजनीति में जनसमस्याओं का सुधार हो गया तो फिर बरगलाने के लिए मुद्दे कहां बचेगे।
