मनमिंद्र अरोड़ा- कुल्लू जिला के मुख्यालय ढालपुर में इन दिनों गांधी शिल्प मेले की धूम मची हुई है। इस मेले में 14 राज्यों के 100 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें व्यापारी अपने राज्यों की हथकरघा व हस्तशिल्प से बनी चीजों का व्यापार और प्रदर्शन कर रहे है , लेकिन इन सब दुकानों में एक स्टॉल ऐसा भी है जहां पर बेकार पड़े प्लास्टिक से उत्पाद बनाकर उन्हें तैयार किया जा रहा है और जनता द्वारा भी इस उत्पाद को काफी पसंद कर रही है ।
एक साल से खड्डी पर प्लास्टिक रैपर से कर रहे बैग तैयार
ढालपुर में आयोजित गांधी शिल्प मेले में लखनऊ के शिल्पकार शिराज प्लास्टिक के बेकार सामानों से हैंडबैग तैयार कर रहा है और इन उत्पादों के माध्यम से जनता को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। शिराज के द्वारा प्लास्टिक जैसे कुरकुरे, चिप्स, चॉकलेट के रैपर से हैंडबैग तैयार किए जा रहे हैं , ताकि प्लास्टिक को रिसाइकल किया जा सके और पर्यावरण को नुकसान भी ना पहुंचे । ढालपुर में स्टॉल लगाने वाले शिराज का कहना है कि 7 साल पहले उन्होंने एजुकेशनल एंड वेलफेयर संस्था से जुड़कर स्वच्छता को लेकर विभिन्न अभियान चलाए थे। इसी दौरान उन्होंने प्लास्टिक को रिसाइकल करने का काम अपने दोस्त के साथ मिलकर शुरू किया। लगभग 1 साल पहले कर का आर्ट शिल्प सोसाइटी बनाकर उन्होंने अपना कारोबार करना शुरू किया। शिराज ने बताया कि प्लास्टिक रेपर को रिसाइकल कर उसे हैंडबैग बनाकर अपना कारोबार चला रहे हैं। तो वहीं उन्होंने कई लोगों को भी आत्मनिर्भर किया है। उन्होंने बताया कि वह अपने इलाके में 15 लोगों को इसका प्रशिक्षण दे चुके हैं और लोग भी अब प्लास्टिक रीसायकल से अपना रोजगार कमा रहे हैं ।
शिल्पकार शिराज के कहना है कि उन्होंने पहली बार लखनऊ से बाहर अपना स्टॉल हिमाचल प्रदेश में लगाया है और यहां लोग प्लास्टिक रीसायकल से बने हैंडलूम भी काफी पसंद कर रहे हैं। शिराज ने बताया कि संस्था के माध्यम से स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं । इसके अलावा अपने शहर में भी प्लास्टिक रेपर को एकत्र करने में जुटे हुए हैं , ताकि उन रैपर को निकालकर हस्तशिल्प को बढ़ावा दे सकें ।
इस तरह तैयार किया जाता है प्लास्टिक से हैंडबैग
शिराज ने बताया कि प्लास्टिक को धोने के बाद हैंडलूम खड्डी पर तीन तरह की लेयर तैयार की जाती है । लेयर को सैनिटाइज करने के बाद 2 दिनों तक धूप में सुखाकर लंबी पटिया तैयार की जाती है, फिर खड्डी में पट्टियां की बुनाई करके अलग-अलग थान तैयार किए जाते हैं और उसे दर्जी के द्वारा एक बैग तैयार किया जाता है। एक बैग को तैयार करने में अढ़ाई घंटे का समय लगता है।। वहीं इनकी कीमत 200 से 900 तक रखी गई है।
